दयानिधि मारन क़ी मुश्किल बढ़ी, इस्तीफे कि मांग तेज

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे होने के बावजूद द्रमुक के नेता और केंद्रीय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन के इस्तीफे की मांग तेज हो गयी है।

मारन ने गुरुवार को न सिर्फ केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में हिस्सा लिया, बल्कि अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को राजनीतिक षडयंत्र करार दिया.

मारन पर आरोप है कि उन्होंने अपने वोट क्लब आवास में 323 कनेक्शन वाला एक बीएसएनएल टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित किया और इसे अपने भाई के सन टीवी नेटवर्क से जोड़ दिया.

इस आरोप के बाद मारन ने पहली बार कैबिनेट की बैठक में हिस्सा लिया. मारन ने गुरुवार को ही एक समाचार पत्र को एक कानूनी नोटिस भेजा और नुकसान की भरपाई के लिए 10 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा.

दरअसल, समाचार पत्र 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक 2004 से 2007 तक केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रहते हुए मारन ने भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) को लूट लिया.

मारन ने कहा कि आलेख उन्हें बदनाम करने के लिए प्रकाशित किया गया है. उन्होंने अखबार से बिना शर्त माफी मांगने और इसे बड़े अक्षरों में प्रकाशित करने की मांग की है और नुकसान की भरपाई के लिए 10 करोड़ रुपये का हर्जाना देने के लिए कहा है. ऐसा नहीं करने पर अखबार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

इसके साथ ही 2जी लाइसेंस आवंटन में एक निजी कम्पनी की तरफदारी के लग रहे आरोप पर मारन ने गुरुवार को खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्हें बचाव के लिए अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए.

नई दिल्ली में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हिस्सा लेने के बाद लौटे मारन ने कहा कि जब उनके भाई कलानिधि मारन के टेलीविजन चैनल में समूह की एक निजी दूरसंचार कम्पनी ने निवेश किया था, तब वह राजनीति में हाशिए पर थे.

उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने कोई गलती की है, तो वह सजा के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए.

उन्होंने कहा कि जब उन्होंने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन-एक सरकार से इस्तीफा दिया था, तब उनके खिलाफ जांच हो सकती थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. यहां तक कि नियंत्रक और महालेखा परीक्षक ने भी उनके नाम का उल्लेख नहीं किया है.

उन्होंने कहा, "मुझ पर किसी को मदद करने का आरोप लगा है. मैंने किसी को मदद नहीं की है. जब मैं राजनीति में हाशिए पर था, तब किसी ने मेरे भाई की कम्पनी में निवेश किया. सीबीआई मेरे खिलाफ जांच कर रही है. यदि कोई निजी उद्यमी कारोबार में निवेश करना चाहता है, तो इसमें मेरी कोई भूमिका नहीं है. मैंने किसी को मदद नहीं पहुंचाई है. मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है."

दूसरी ओर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मांग की है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भ्रष्टाचार के मामले में फंसे केंद्रीय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन के मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए उनके खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई करें.

भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने लखनऊ में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तीन दिनों से इस मुद्दे पर मौन हैं. हम उनसे चुप्पी तोड़ने के लिए कह रहे हैं. कृपया अपनी पुरानी गलतियों से तो सीख लें." प्रसाद ने आरोप लगाया कि मनमोहन सिंह ने 2जी घोटाले में तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए. राजा को बचाने की कोशिश की थी.

एयरसेल-मैक्सिस करार को पूरी तरह से रिश्वत का मामला बताते हुए प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री इस पर मारन के खिलाफ निष्पक्ष कारवाई करें नहीं तो देश की जनता उनके खिलाफ निष्कर्ष निकालने के लिए मजबूर हो जाएगी.

प्रसाद के अनुसार, जब मारन केंद्रीय दूरसंचार मंत्री थे, उस समय मलेशियाई कम्पनी मैक्सिस कम्युनिकेशन ने एयरसेल में 74 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी. बाद में कम्पनी को और भी क्षेत्र आवंटित कर दिए गए.

मैक्सिस कम्युनिकेशन ने अपनी सहयोगी कम्पनी एस्ट्रो के जरिए लगभग 600 करोड़ रुपये सन नेटवर्क के सन डीटीएच में निवेश किया था.

Posted by गजेन्द्र सिंह at 10:14 am.

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