सत्याग्रह के नाम पर जनभावनाओं से खिलवाड़
राजनीति, विशेष 8:13 am
उनका जीवन कैसा रहा और किस मोड़ पर आकर खड़ा हुआ है? यह घटनाक्रम कोई तिलिस्म से नहीं, बल्कि भोले-भाले तथा पवित्र भाव वाले लोगों के साथ एक नियोजित षड़यंत्र, छल-प्रपंच आदि-आदि से ‘‘भावनात्मक डकैती’’ द्वारा अपार सम्पत्ति हड़पने से कौड़ी से करोड़पति बनने से भरा पड़ा है। इन्हीं बाबा रामदेव को देखिए।
इन्हें तथाकथित राष्ट्रभक्त तथा जादुई बाबा बनने का सौभाग्य मिला है। वे उपदेश दे रहे हैं, काले धन की कमाई से काले धन की वापसी का। तो क्या राष्ट्र उनके आचरण से बेखबर है? नहीं! वक्त आने पर उन्हें उसी तिहाड़ की कतार में खड़ा होना होगा जहां अन्य...तमाम हुए।
नेपाल के सर्वाधिक लोकप्रिय ‘कान्तिपुर’ समाचार पत्र ने एक अर्से पहले योग विश्वविद्यालय के लिए 1300 रूटनी (100 बीघा) वेशकीमती जमीन काठमांडू में स्थित भक्तोपुर का प्रकरण छापा था और तथाकथित योग गुरू का एक चेला जो नेपाल में इंजीनियरिंग काउंसिल का अध्यक्ष है उसके द्वारा जो भूमिका निभाई गई वह भी प्रकाशित हुई। इस तरह नैतिकता व ईमानदारी का पाठ पढ़ाने वाले ‘बगुला भगत’ को राष्ट्र की भावना के साथ खिलवाड़ करने के लिए माफी मांगनी चाहिए। वहीं अब केंद्र सरकार को चाहिए कि ‘बाबा के धावा’ की बारीकी जांच करानी होगी जिससे तिहाड़ की भूमि पर दायित्व बोध का प्रशिक्षण वे ले सकें।
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो जेहाद छेड़ी है, उसका कोई मुकाबला नहीं कर पायेगा। क्योंकि यह अन्ना हजारे का नहीं, समूचे राष्ट्र का सवाल था, वर्तमान में अन्ना हजारे को मिली लोकप्रियता के कारण बाबा बुनियादी सवाल को सियासत का मुद्दा बनाकर ओछी लोकप्रियता हासिल करना चाहते हैं, यह घटनाक्रम दुखद ही नहीं अपितु दुर्भाग्यपूर्ण है। फिर भी गांधी के विचारों के संवाहक अन्ना हजारे तमाम नकारात्मक सवालों की अनदेखी करते हुए बाबा के सत्याग्रह में हिस्सा लेंगे, इसके लिए अन्ना को साधुवाद।
साधु बाबा की कलई खुलने से पता चला है कि यह बहुत बड़ा प्रापर्टी डीलर तथा व्यवसाई है। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने साहसपूर्ण ढंग से जो बातें रामदेव के बारे में कहीं, वे अक्षरसः सत्य हैं। लोगों में जनचर्चा है कि नेपाल में योग प्रशिक्षण शिविर लगाया तो नेपाली प्रधानमंत्री ने जन भावनाओं का समादर करते हुए उसमें हिस्सा लिया। वहां प्रचंड जैसे लोकप्रिय नेता ने भी न चाहते हुए शिविर में भाग लिया और कार्यकर्ताओं के क्रोध को झेला। उन्हीं बाबा ने प्रधानमंत्री से सौ एकड़ भूमि आवंटित करा ली और फिर बेचकर करोड़ों के बारे न्यारे कर लिये।
इसी तरह जनचर्चा है कि रांची (झारखंड) में रामदेव ने केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय के साथ मिलकर व्यावसायिक संस्थान बनाकर अभिलेखीय कौशल से अंतर्राष्ट्रीय ‘फूड पार्क’ का झांसा देकर बाजार, होटल, आवास तथा अत्याधुनिक व्यवसायिक स्पर्धा की तैयारी के साथ फूड प्रासेसिंग के नाम पर 200 करोड़ का अनुदान डकार लिया। अब उसी अनुदान की कीमत मांगने बार बार सुबोध कांत सहाय बाबा रामदेव के चक्कर लगा रहे हैं।
बात यही तक नहीं है, दिल्ली व मुंबई के बिल्डर से हरिद्वार के खाली पड़े मैदान में आवास बनाने का ढांचा भी खींचा तथा 50 प्रतिशत आर्थिक लाभ की करोड़ों की पेशकश रखी मगर युवा बिल्डर बाबा की करामाती चाल को समझ गये हैं और थोड़ा बहुत गंवाकर ‘ईश्वर को’ प्रसाद बांटकर मुक्ति की कृपा करने पर धन्यवाद देने लगे।
यही बाबा भारी आडम्बर के साथ सत्याग्रह के नाम पर जनभावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं। करोड़ों के बारे न्यारे करने वाले ‘रामदेव’ को जान लेना चाहिए कि काला धन आंदोलन से नहीं, नैतिकता से ही आयेगा। अन्ना इस बात के प्रतीक है कि आडंबर दिशाहीनता की ओर ले जायेगा। मनवाणी और कर्म से नैतिकता धारण करने वाला ही दृढ़ इच्छा शक्ति रखता है। ‘चोर’ कभी चोरी रोकने के पक्ष में कारगर नहीं हो सकता, वह तो सिर्फ आडंबर ही कर सकता है।

