महंगाई भारी पड़ रही है दिवाली की खरीदारी पर

दिवाली की खरीदारी पर महंगाई भारी पड़ रही है. कारपोरेट आर्डरों में भी भारी गिरावट आई.

व्यापारियों का कहना है कि बाजार में खरीदार तो हैं, पर महंगाई की वजह से उन्होंने अपने बजट में कटौती कर दी है.

दिवाली पर उपहारों के आदान-प्रदान की परंपरा बरसों से चली आ रही है, लेकिन इस साल न केवल भारतीय गिफ्ट आइटम्स, बल्कि चीन से आयातित विभिन्न प्रकार के उत्पाद काफी महंगे हो चुके हैं.

विदेशों से माल मंगाने वाली व्यापारियों का कहना है कि डालर की तुलना में रुपए में कमजोरी से आयातित माल की लागत पहले ही 15 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है. एक और खास बात यह है कि इस बार कारपोरेट जगत से आर्डर काफी घट चुके हैं.

व्यापारियों के शीर्ष संगठन कनफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, इस साल हमें दिवाली पर कारोबार में पिछले साल की तुलना में 30 से 35 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद थी. अभी तक बाजार से जो रिपोर्टें मिली हैं उसके मुताबिक अभी तक दिवाली की खरीदारी में पिछले साल से मात्र 10 फीसद का ही इजाफा देखने को मिला है.

खंडेलवाल ने कहा कि बाजार में ग्राहक हैं, पर दाम सुनने के बाद वे खरीद कम कर रहे हैं. आमतौर पर दिवाली पर कारोबार में 50 प्रतिशत तक का इजाफा होता था, पर इस बार महंगाई की वजह से कारोबार पिछले साल के स्तर से कुछ ही अधिक रहेगा.

दिवाली के गिफ्ट आइटम के बाजार में तमाम तरह के इलेक्ट्रानिक्स आइटम, गॉड फिगर्स, तरह-तरह की सिनरियां, कनफेक्शनरी, क्राकरी की भरमार है. खास बात यह है कि उपहार बाजार पर चीनी ड्रैगन का कब्जा इस साल भी दिखाई दे रहा है.

आयात कारोबार से जुड़े पवन कुमार ने बताया कि गिफ्ट आइटम के बाजार पर चीनी उत्पादों का 60 प्रतिशत तक कब्जा है. इस साल उनके दाम भी 15-20 प्रतिशत तक चढ़े हुए हैं. ऐसे में लोगों को इस साल ‘सस्ता’ चाइनीज उत्पाद भी नहीं मिल पा रहा है.

कनफेडरेशन आफ सदर बाजार ट्रेड्स एसोसिएशन के महासचिव देवराज बवेजा कहते हैं, ‘बाजार में भीड़ तो है, पर लोगों ने खरीद का बजट कम कर दिया है. खासकर गिफ्ट आइटम के रूप में लोगों ने अपने बजट में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी है, जिसका असर निश्चित रूप से पूरे कारोबार पर दिखाई दे रहा है.’

चाइनीज उत्पादों का कारोबार करने वाले सोवा वर्ल्ड वाइड के गौतम बजाज कहते हैं कि चीन ने बाजार में सभी तक के उत्पाद उतारे हैं. यदि पिछले साल से तुलना की जाए, तो साल हमें चाइनीज माल 15-20 प्रतिशत तक महंगा पड़ा है.

बजाज ने कहा कि चाइनीज फूलदान का दाम जहां 180 से 390 रुपए है, वहीं वॉटर फॉल के साथ विभिन्न भगवानों की मूर्तियों का दाम 550 से 3,000 है. इसी तरह इस बार चीन से ऐसी सीनरियां आ गई हैं, जो हूबहू प्लाज्मा टीवी और एलसीडी टीवी की तरह नजर आती है.

प्लाज्मा टीवी के आकार की सीनरियों का दाम 290 से 1,050 रुपए और एलसीडी सीनरियों का दाम 650 से 2,400 रुपये तक है. खुदरा बाजार में तो इस तरह की सीनरियां 5,000 रुपए में बिक रही हैं.व्यापारियों का कहना है कि इस साल कारपोरेट जगत से आर्डर तो 50 फीसद तक घट गए हैं.

सीएआईटी के खंडेलवाल कहते हैं, ‘इस बार बाजार में कारपोरेट आर्डर बहुत कम आए हैं. संभवत: कंपनियों ने दिवाली गिफ्ट के रूप में अपने कर्मचारियों को देने के लिए कोई और विकल्प चुना है.’

पवन कुमार कहते हैं कि कारपोरेट जगत में इस साल महंगाई की वजह से कर्मचारियों को नकद उपहार देने की परंपरा शुरू हो गई है.उनका कहना है कि अब कंपनियां दिवाली के बजाय नए साल पर कर्मचारियों को उपहार देने लगी हैं.

Posted by गजेन्द्र सिंह at 6:09 pm.

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