दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ श्रीलंका की टीम 43 रनों पर ढेर
क्रिकेट, खेल, ताजा खबरें 6:08 pm
ये एक दिवसीय मैच में श्रीलंका का न्यूनतम स्कोर है.
अगर रिकॉर्ड को देखा जाए जो इसके पहले श्रीलंका के खिलाफ जिम्बाब्वे 2004 में 35 रनों पर, 2003 में कनाडा 36 रनों पर और 2001 में जिम्बाब्वे 38 रनों पर आउट हो चुकी है.
वैसे 1993 में वेस्ट इंडीज के खिलाफ पाकिस्तान भी 43 रनों पर आउट हो चुकी है.
दक्षिण अफ्रीका ने श्रीलंका के सामने जीत के लिए 302 रनों का लक्ष्य रखा था. लेकिन श्रीलंका 258 रनों से हार गई. वनडे क्रिकेट इतिहास में यह तीसरी सबसे बड़ी हार है.
इसके पहले 2008 में न्यूजीलैंड ने आयरलैंड को 290 रनों से और दक्षिण अफ्रीका ने जिम्बाब्वे को 2010 में 272 रनों से हराया था. इस तरह ये दक्षिण अफ्रीका की दूसरी सबसे बड़ी जीत है.
अगर सिर्फ श्रीलंका के हिसाब से देखें तो इससे पहले उसे 1985 में ऑस्ट्रेलिया के हाथों 232 रनों से करारी हार मिली थी.
पार्ल मैच में श्रीलंका के दोनो सलामी बल्लेबाज उपुल थारंगा और तिलकरत्ने दिलशान खाता भी नहीं खोल सके. ये दूसरी बार है कि श्रीलंका के दोनों सलामी बल्लेबाज बिना कोई खाता खोले पैवेलियन लौट गए. इसके पहले 1998 में भारत के खिलाफ भी श्रीलंका के साथ ऐसा ही हुआ था.
टीम के चार बल्लेबाज तो बिना खाता खोले ही पैवेलियन लौट गए. ऐसा तीसरी बार हुआ कि श्रीलंका के टॉप 6 में से 3 या उससे ज्यादा खिलाड़ी अपना खाता नहीं खोल सकें.
श्रीलंका की ओर से कुलसेकरा ने सबसे अधिक 19 रन बनाए.
एक समय तो श्रीलंका के 6 विकेट सिर्फ 13 रन पर ही गिर गए थे.
अगर पार्ल मैदान के हिसाब से देखे तो ये यहां का दूसरा न्यूनतम स्कोर है. इस मैदान पर 2003 में कनाडा की टीम 36 रन पर आउट हो गई थी.श्रीलंका के साथ ये नौवीं बार है कि उसकी टीम सौ रन से कम पर आउट हुई है

