माओवादी की कांग्रेस बैठक के मद्देनजर घने जंगलों वाले इलाके की निगरानी कड़ी

माओवादी की कांग्रेस बैठक पर छत्तीसगढ और महाराष्ट्र की सीमाओं के घने जंगलों वाले इलाके की निगरानी कड़ी कर दी गई है.

भाकपा-माओवादी की कांग्रेस छत्तीसगढ और महाराष्ट्र की सीमाओं के इलाके में होने की संभावनाओं के मद्देनजर सुरक्षा बलों ने घने जंगलों वाले इस इलाके की निगरानी कडी कर दी है और आसपास के रेलवे स्टेशनों तथा सडक मार्ग सहित हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है.

केन्द्र ने नक्सल प्रभावित राज्यों को एलर्ट करते हुए कड़े सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने को कहा है.

सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों ने बताया कि माओवादियों की कांग्रेस पांच साल बाद अगले महीने होने जा रही है और इसमें संगठन के शीर्ष नेता लक्ष्मण राव उर्फ गणपति सहित कई वरिष्ठ नेताओं के देश भर से आने की संभावना है.

सूत्रों ने कहा, ‘‘ माओवादी बैठक के लिए किसी सुरक्षित ठिकाने की तलाश कर रहे हैं और इस बात की पूरी संभावना है कि वे छत्तीसगढ,महाराष्ट्र सीमा के इलाके अबूजमार का चयन करेंगे क्योंकि अबूजमार सुरक्षित ठिकाना है, जिस पर उनका पूरी तरह कब्जा है.

यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के आसपास पड़ता है. घने जंगलों वाले इस इलाके तक तो सुरक्षाबल पहुंच पाये हैं और ही कोई सरकारी एजेंसी पहुंचकर कोई विकास कार्य कर पायी है.

बताया जाता है कि अबूजमार में आबादी और रिहाइश को लेकर भी कोई आंकड़ा सामने नहीं आया है.

उन्होंने दावा किया कि बैठक में गणपति के अलावा प्रवक्ता अभय, आदिवासी नेता मिसिर बेसरा, वरिष्ठ नेता प्रशांतो बोस उर्फ किशन दा के अलावा छत्तीसगढ, महाराष्ट्र, बिहार, उडीसा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, झारखंड सहित विभिन्न राज्यों के माओवादी नेता शिरकत करेंगे.

सूत्रों के मुताबिक, केन्द्र सरकार ने नक्सल प्रभावित राज्यों को एलर्ट करते हुए सुरक्षा कडी करने का निर्देश दिया है.

सूत्रों ने बताया कि नक्सलियों की कांग्रेस में पोलितब्यूरो और केन्द्रीय कमेटी का पुनर्गठन होगा और इसमें रिक्त पड़े पदों को भरे जाने की संभावना है.

पिछले दिनों नक्सलियों के कई बड़े नेता सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड में मारे गये जबकि कुछ अन्य बड़े नेता जेल में हैं.

भाकपा-माओवादी की पोलितब्यूरो के 14 सदस्यों में से सात जेल में हैं, जिनमें कोबाद घांडी, अमिताभ बागची और प्रमोद मिश्रा प्रमुख हैं.

कोटेर राव उर्फ किशनजी तथा चेरूकुरी राजकुमार उर्फ आजाद को सुरक्षाबलों ने मुठभेड में मार गिराया जबकि गणपति, केशव उर्फ केशव राव जैसे नेता भूमिगत हैं.

यही हाल केन्द्रीय कमेटी का भी है .केन्द्रीय कमेटी के 37 में से 23 सदस्य देश की विभिन्न जेलों में बंद हैं.

सूत्रों के अनुसार, ‘‘ इस बात की पूरी संभावना है कि माओवादियों के सभी वरिष्ठ नेता अपने खुफिया ठिकानों से आएंगे और पार्टी कांग्रेस में शामिल होंगे.

बताया जाता है कि नक्सल प्रमुख गणपति की जगह इस बार किशन दा को नेता चुना जा सकता है क्योंकि अब तक नक्सलियों के जितने भी बडे नेता हुए, सभी आंध्र प्रदेश के हैं.

अब नक्सलियों में यह बहस होने लगी है कि आंध्र के नेता किसी अन्य राज्य में आकर क्यों नेतृत्व प्रदान करें .उन्हें आंध्र वापस जाकर फिर से वहां नक्सलवाद को नये सिरे से खडा करना चाहिए.

सूत्रों ने कहा कि बैठक में माओवादी अपनी भावी रणनीति और हाल ही में मिले कई झटकों के बाद अपने कैडरों के लिए नये दिशानिर्देश तैयार करने पर भी विचार करेंगे.

बैठक में राज्य कमेटियों का भी पुनर्गठन होगा .दरअसल यह पार्टी कांग्रेस माओवादियों के अगले पांच साल कारोडमैपतैयार करेगी.

इस बीच खबरें ये भी हैं कि कड़े सुरक्षा बंदोबस्त के मद्देनजर अपने नेताओं की सुरक्षा के लिहाज से माओवादी बैठक टाल भी सकते हैं.

Posted by गजेन्द्र सिंह at 10:27 am.

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