बाबा रामदेव का अनशन सत्याग्रह के नाम पर देश के साथ धोखा
राजनीति 12:31 am
जब रामदेव ने दोपहर तक सत्याग्रह समाप्त होने की घोषणा नहीं की तो दोपहर बाद कपिल सिब्बल पीआईबी पहुंच गये और उन्होंने आचार्य बालकृष्ण की वह चिट्ठी सार्वजनिक कर दी जिसमें उन्होंने सत्याग्रह के शुरू होने से पहले ही खत्म होने का आश्वासन दे दिया था.
असल में पिछले तीन दिनों से बाबा रामदेव दिल्ली में हैं और उनकी मंत्रियों के साथ बातचीत हो रही है. कपिल सिब्बल के साथ उनकी कल दो दौर की बात हुई थी. पहले दौर की बात गोल्फ लिंक्स में हुई थी जबकि दूसरे दौर की बात क्लैरिजेज होटेल में हुई थी. शायद बाबा रामदेव और बालकृष्ण को नहीं मालूम कि दिल्ली का क्लैरिजेज होटल राजनीतिक जोड़ तोड़ के लिए कांग्रेस का पुराना अड्डा रहा है.
इसी होटल में आचार्य बालकृष्ण ने वह काम कर दिया जिससे उनकी कलई आज खुल गयी. इसी मीटिंग में बालकृष्ण ने अपने हाथ से लिखी एक चिट्ठी में उन्हें आश्वासन दे दिया कि "सरकार ने हमको लिखित जवाब दे दिया है और हम इस पर सहमत हैं. उम्मीद है सरकार गंभीरता से इस पर विचार करेगी, और ठोस कदम उठायेगी." इसके आगे चिट्ठी में लिखा गया है कि क्योंकि सरकार ने उनकी सारी बातें मान ली हैं इसलिए वे 4 से 6 जून तक रामलीला मैदान पर मौजूद रहेंगे. इस बीच 4 जून को सुबह अनशन शुरू करेंगे और दोपहर तक खत्म कर देगे.
रामदेव के ऊपर इस चिट्ठी से बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है कि अगर उन्होंने सरकार से समझौता कर लिया था तो फिर अनशन और सत्याग्रह के नाम पर पूरे देश को दिनभर बेवकूफ क्यों बनाते रहे? शाम को जब पत्रकारों ने उनसे यही सवाल पूछा तो रामदेव के पास कोई जवाब नहीं था और वे टाल मटोल करते रहे.
हां, इस सवाल पर उनके सत्याग्रही जरूर उत्तेजित हो गये जो बाबा रामदेव के लिए दवाइयों का कारोबार करते हैं या फिर योग के कैंप करते हैं. इसके लिेए बाकायदा बाबा रामदेव के ट्रस्ट से उन्हें पैसा दिया जाता है और यहां की लगभग सारी जनता रामदेव के योग करने और सिखानेवाले ही आये हैं.
जब कपिल सिब्बल ने आचार्य बालकृष्ण की चिट्ठी सार्वजनिक कर दी तो बाबा रामदेव के होश उड़ गये. शाम को साढ़े पांच बजे उन्होंने मीडिया और उपस्थित सत्याग्रहियों से बात की थी और भरोसा दिलाया था कि जल्द ही वे कोई बड़ा ऐलान करनेवाले हैं. आठ बजे के करीब बाबा रामदेव दोबारा लौटे. तब तक कपिल सिब्बल बालकृष्ण की चिट्ठी सार्वजनिक कर चुके थे. रामदेव दोबारा लौटे तो बौखलाए हुए थे. सफाई दे रहे थे.
उन्होंने कहा कि "अगर देश में अस्थिरता और अशांति पैदा होती है तो उसके लिए कपिल सिब्बल जिम्मेदार होंगे." निश्चित रूप से अब बाबा रामदेव अपना चेहरा बचाने की कोशिश में लग गये हैं. बातचीत के नाम पर सरकार ने उन्हें जिस तरह से घेर रखा था उसका नतीजा सामने आ गया है. सिब्बल ने रामदेव के साथ विश्वासघात किया है तो रामदेव ने सत्याग्रह के नाम पर देश के साथ छल किया है.
अब भले ही बाबा रामदेव कहें कि कपिल सिब्बल ने उनके साथ धोखा किया है. इसलिए अब वे उनके साथ आगे कोई वार्ता नहीं करेंगे लेकिन बाबा रामदेव ने भी सत्याग्रह के नाम पर देश के साथ धोखा किया है. क्या अब भी उनकी बात कोई सुनेगा? अगर वे पहले ही सरकार से समझौता कर चुके थे तो फिर सत्याग्रह का नाटक क्यों किया?
हालांकि बाबा रामदेव भारत माता की जय और वंदेमातरम के नारे लगवाकर अपनी लाज बचाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनके सत्याग्रह की कलई खुल चुकी है जिसके दोबारा चढ़ने की कोई उम्मीद नहीं है.

