दिल्ली से रोजाना गायब हो जाते है 18 से 20 बच्चे
राष्ट्रीय, विशेष 11:44 am
हाल ही में जारी चाइल्ड राइट्स एंड यू ( क्राई ) की एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि दिल्ली से रोजाना 18 से 20 बच्चे गुम हो जाते हैं , जिनमें से ज्यादातर की उम्र 12 से 18 साल के बीच होती है।
इन गुम होने वाले बच्चों में से 6.76 पर्सेंट की उम्र 0-6 साल , 6.76 पर्सेंट की 7-12 साल और 72.8 पर्सेंट की उम्र 12-18 साल के बीच होती है। ये तो वे आंकड़े हैं जो पुलिस और आरटीआई की मदद से मिले हैं। पर कई ऐसे केस भी हैं जिनके बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं हैं।
अगर उन आंकड़ों को भी मिला लिया जाए तो ये आंकड़े और भी बढ़ जाएंगे। क्राई की इस रिपोर्ट को दिल्ली , उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से मिले आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है।
इस रिपोर्ट पर बहस के लिए क्राई की ओर से शुक्रवार को चर्चा का आयोजन किया गया था। इस मौके पर खोए बच्चों के पैरंट्स के अलावा जूरी भी मौजूद थी। इस बहस में नांगलोई से आई खुरनारा ने बताया कि उनकी 9 साल की बेटी नेहा घर से गायब हो गई थी। कई दिनों तक ढूंढने के बाद उसका कुछ भी पता नहीं चल पाया और पुलिस की तरफ से भी इतना सहयोग नहीं मिल पाया था। लेकिन मैं किस्मत वाली थी कि मेरी बेटी मुझे कुछ दिनों बाद वापिस मिल गई। पर हर मां - बाप खुरनारा की तरह किस्मत वाले नहीं होते। ऐसे भी कई लोग वहां मौजूद थे जिनके बच्चों का आजतक कोई पता नहीं चल पाया कि वे कहां हैं।
जूरी में संयुक्त पुलिस आयुक्त एस . नृत्यनंजन , एनसीपीसीआर के वरिष्ठ सलाहकार डॉ . रमाकांत नायक , डीसीपीसीआर के डॉ . आमोद कंठ , सेंटर फॉर चाइल्ड की भारती अली , सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज डी . पी . वधवा और दिल्ली हाई कोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस ए . पी . शाह जैसी हस्तियां मौजूद थीं। क्राई की डायरेक्टर योगिता वर्मा ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए काफी जरूरी है कि सभी केसों के अपडेटेड रेकॉडर्स हों।

