पुण्यतिथि 23 जुलाई पर विशेष : महमूद
मनोरंजन 7:17 pm
करीब 300 फिल्मों में अभिनय कर चुके महमूद बाल कलाकार से हास्य अभिनेता के रूप मे स्थापित हुये. उनका जन्म सितम्बर 1933 को मुंबई में हुआ था. उनके पिता मुमताज अली बाम्बे टाकीज स्टूडियो में काम करते थे. बचपन से ही महमूद का रूझान अभिनय की ओर था और वह अभिनेता बनना चाहते थे.
पुण्यतिथि 23 जुलाई पर विशेष:
पिता की सिफारिश की वजह से महमूद को बाम्बे टाकीज की वर्ष 1943 में प्रदर्शित फिल्म किस्मत में अभिनेता अशोक कुमार के बचपन की भूमिका निभाने का मौका मिल गया. इसके बाद महमूद फिल्म निर्माता ज्ञान मुखर्जी के यहां बतौर ड्राईवर काम करने लगे. उन्हें मालिक के साथ हर दिन स्टूडियो जाने का मौका मिलता था जहां वह कलाकारों को करीब से देख सकते थे.
इसके बाद महमूद एक के बाद एक गीतकार भरत व्यास, राजा मेंहदी अली खान और निर्माता पीएल संतोषी के ड्राइवर बनते चले गये. उनके किस्मत का सितारा तब चमका जब एक फिल्म की शूटिंग के दौरान अभिनेत्री मधुबाला के सामने एक जूनियर कलाकार लगातार दस रीटेक के बाद भी अपना संवाद नहीं बोल पाया. फिर यह संवाद महमूद को बोलने के लिये दिया गया जिसे उन्होंने बिना रीटेक एक ही बार में ओके कर दिया.
महमूद को पारिश्रमिक के तौर पर 100 रूपये मिले जबकि बतौर ड्राईवर उन्हें महीने में मात्र 75 रूपये ही मिला करते थे. लिहाजा उन्होंने ड्राइवरी का काम छोडकर अपना नाम जूनियर आर्टिस्ट एसोसियेशन में दर्ज करा दिया. फिर शुरु हुआ फिल्मों में काम पाने के लिये संघर्ष का दौर.
बतौर जूनियर आर्टिस्ट महमूद ने दो बीघा जमीन, जागृति, सीआईडी और प्यासा जैसी फिल्मों में छोटी-छोटी भूमिकाएं निभायीं. वर्ष 1958 मे प्रदर्शित फिल्म परवरिश में पहली बार महमूद को अच्छी भूमिका मिल गयी. इस फिल्म में उन्होंने राजकपूर के भाई की भूमिका निभायी.
महमूद को एमवी प्रसाद की वर्ष 1961 मे प्रदर्शित फिल्म ससुराल में काम करने का अवसर मिला. इस फिल्म की सफलता के बाद बतौर हास्य अभिनेता महमूद फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने मे सफल हो गये. फिल्म ससुराल में उनकी जोडी अभिनेत्री शुभा खोटे के साथ काफी पसंद की गयी. इस फिल्म के बाद महमूद और शुभा खोटे की जोड़ी ने जिद्दी 1964 और लव इन टोकियो 1966 जैसी कई फिल्मों में अपने हास्य अभिनय से दर्शको को हंसाते-हंसाते लोटपोट कर दिया.
वर्ष 1961 मे प्रदर्शित फिल्म ससुराल महमूद के फिल्मी कैरियर की पहली हिट फिल्म साबित हुयी. इस फिल्म की कामयाबी के बाद उन्होंने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रख दिया और वर्ष 1961 में अपनी पहली फिल्म छोटे नवाब का निर्माण किया. इस फिल्म के जरिये महमूद ने आरडी बर्मन उर्फ पंचम दा को बतौर संगीतकार फिल्म इंडस्ट्री में पहली बार पेश किया.
वर्ष 1965 मे प्रदर्शित फिल्म गुमनाम में महमूद के अभिनय का एक अलग अंदाज दर्शकों के सामने आया. रहस्य रोमांच से भरी इस फिल्म मे महमूद ने एक बावर्ची की भूमिका निभायी. इस फिल्म में उन पर फिल्माया एक गीत ...हम काले है तो क्या हुआ दिलवाले है सिने दर्शक शायद ही कभी भूल पाएं.
वर्ष 1962 मे प्रदर्शित फिल्म दिल तेरा दीवाना के लिये सबसे पहले महमूद को सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता का फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया. इसके बाद वर्ष 1966 मे प्रदर्शित फिल्म प्यार किये जा और वर्ष 1975 मे प्रदर्शित फिल्म वरदान के लिये भी महमूद सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किये गये.
पांच दशक से लंबे सिने कैरियर में करीब 300 फिल्मों में अपने अभिनय का जौहर दिखाकर वह 23 जुलाई 2004 को इस दुनिया से हमेशा के लिए रूखसत हो गये.

