हरिद्वार, सावनी सोमवार : सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम
आध्यात्म, विशेष 11:26 am
आंखो देखी संवाददाता : तीर्थ नगरी हरिद्वार में पहले सावनी सोमवार को कांवरियों की जबर्दस्त भीड़ जुटने की संभावना के मद्देनज़र सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं.
मुंबई में हुये विस्फोटों को देखते हुये इस बार हरिद्वार में विशेष सतर्कता बरती जा रही है और कांवरियों के लाठी, डंडे, हाकी और त्रिशूल लेकर चलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
सावन के पहले सोमवार को अपने इष्ट देव भोले शंकर को गंगाजल चढ़ाने की मनोकामना लिए इस समय पूरी तीर्थनगरी चारों तरफ कांवड़ यात्रियों से पटी हुई है.
सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार श्रावण महीने में भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिये लाखों की संख्या में कांवड़िये हरिद्वार से गंगा का जल लेकर विभिन्न स्थानों पर स्थित भगवान शंकर के मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं.
इसी के चलते पूरी तीर्थ नगरी में इस समय पांच लाख से भी अधिक कांवरिये पहुंच चुके हैं. चारों तरफ ‘हर हर, बम बम’ के नारे लगाते कांवरियों को आते जाते देखा जा सकता है.
जिला प्रशासन ने इस अवसर पर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिये जहां सादे वेश में पुलिसकर्मियों को चप्पे-चप्पे पर तैनात किया हुआ है वहीं हर की पैड़ी, चंडीघाट, प्रेमनगर घाट सहित अन्य स्थानों पर सशस्त्र पुलिस बल की 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित की गयी है.
श्रावण महीने की शुरुआत गत 16 जुलाई से हुई है और 18 जुलाई को पहला सोमवार पड़ने के चलते इस नगरी में लाखों की संख्या में कांवरियों का तांता लग गया है. गंगा किनारे कांवरियों के पूजा पाठ के लिये पुजारियों और पंडों की गद्दियां सजी हुई हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देश के विभिन्न इलाकों से आने वाले कांवरिये पहले गंगा किनारे पूजा पाठ करते हैं और इसके बाद ही वे अपनी अपनी गगरी और कमंडल में गंगा जल लेकर अपने इष्ट भगवान शिव के मंदिर जाने के लिये पदयात्रा शुरू करते हैं.
हरिद्वार के पुलिस अधीक्षक केवल खुराना ने बताया कि इस वर्ष तो बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या एक करोड़ तक पहुंच सकती है. कांवर यात्रा को देखते हुये पूरे इलाके को चार सुपर जोन, 18 जोन और 75 सेक्टर में बांटा गया है. इन सभी स्थानों पर सेक्टर मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में पुलिस अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को बारह बारह घंटे के लिये तैनात किया गया है.
खुराना ने बताया कि मुंबई में हुये विस्फोटों को देखते हुये इस बार विशेष सतर्कता बरती गयी है और कांवरियों के लाठी, डंडे, हॉकी और त्रिशूल लेकर चलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
कांवड़ यात्रा के अवसर पर पूरे एक महीने के लिए हरिद्वार, रिषिकेश और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर सावन मेले का आयोजन किया गया है. मेले को देखते हुए पूरे इलाके में सैकड़ों की संख्या में दुकानें भी सजा दी गई हैं.
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार कांवरियों की भारी भीड़ को देखते हुये मेरठ, हरिद्वार राजमार्ग को बंद कर दिया गया है और इस मार्ग पर आने वाले वाहनों को वाया बिजनौर चलाया जा रहा है. इसी तरह मुजफ्फरनगर से हरिद्वार मार्ग पर जाने वाले चार पहिया वाहनों को भी रोक दिया गया है.
शिवभक्तों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो इसके चलते मार्गों को बदला जा रहा है.
रिषिकेश क्षेत्र के दुकानदार ललित शर्मा ने बताया कि हजारों की संख्या में कांवड़ यात्री गंगा जल लेकर प्रसिद्ध नीलकंठ महादेव को जल अर्पित करने जाते हैं. इस बार इनकी संख्या 30 लाख से भी ऊपर होने की संभावना है. उन यात्रियों के लिए मार्ग में जगह-जगह विश्राम करने के दौरान भोजन और अन्य जरूरतों के लिए दुकानें लगाई गई हैं. उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर तो नि:शुल्क भोजन कराने की व्यवस्था भी की गयी है.

