अनशन पर बैठे नागनाथ की हालत बिगड़ी
आध्यात्म 1:46 pm
वाराणसी, आँखों देखी न्यूज़ : वाराणसी में मणिकर्णिका स्थित महाश्मशाननाथ पीठ के बाबा नागनाथ गंगा के अविरल प्रवाह के लिए 1083 दिनों से अनशन पर हैं। शिव प्रसाद गुप्त राजकीय अस्पताल में भर्ती बाबा को हालत बिगड़ने पर बीएचयू रिफर किया गया। लेकिन उन्होंने जाने से इंकार कर दिया है।
आम दिनों में महाश्मशाननाथ पीठ के चबूतरे पर धूनी रमाए रहने वाले बाबा नागनाथ की दशा ने लोगों को विचलित कर रखा है। इन दिनों गंगा भले ही लबालब हो, लेकिन सभी जानते हैं कि यह चांदनी फकत चार दिनों की ही है। बरसात बाद गंगा पुन: सिसकेगी। टिहरी में बंधी गंगा को मुक्त कराने की मांग को लेकर बाबा नागनाथ को अनशन के दौरान सात मर्तबा अस्पताल पहुंचाना पड़ा है। लेकिन उनका अनशन टूटा नहीं है।
अब अनशन जंतर-मंतर पर
सिर्फ पानी के सहारे जिंदा बाबा नागनाथ इन दिनों ऑक्सीजन पर हैं। उनका हठ है कि गंगा के लिए वह अपना अनशन जारी रखेंगे। इसके लिए प्राण भले चले जाएं। 'जागरण' से बाबा नागनाथ ने कहा-'अस्पताल से छुट्टी मिलते ही दिल्ली में जंतर-मंतर पर अनशन करुंगा।' मणिकर्णिका घाट पर रहने वाले शिवसेना के महासचिव विजय शंकर पांडेय का कहना है कि बाबा के अस्पताल से छूटते ही उनके निर्देश पर आंदोलन की रूपरेखा बनेगी।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ली सुधि
श्रीविद्यामठ के पीठाधीश्वर व गंगा सेवा अभियान के संयोजक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अस्पताल पहुंचकर बाबा का हालचाल जाना, दुख व्यक्त किया और सिस्टम के प्रति आक्रोश भी। संत समाज उनकी सुधि लेता रहता है, भक्त जन पहुंचते रहते हैं लेकिन हुक्मरानों को फुर्सत कहां।
नजर रखे है जिला प्रशासन
वाराणसी। एडीएम [सिटी] एमपी सिंह ने बताया कि बाबा नागनाथ से जुड़ा मसला जिला प्रशासन के संज्ञान में है। निर्मल-अविरल गंगा को टिहरी से मुक्त कराने की उनकी मांग केंद्र सरकार से जुड़ी है। स्थानीय स्तर पर इसमें कुछ भी नहीं हो सकता। बाबा नागनाथ की ओर से केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन समय-समय पर प्रेषित कर दिया जाता है। उनके स्वास्थ्य पर डॉक्टरों की एक टीम लगातार नजर बनाए है।
शिवप्रसाद गुप्त मंडलीय अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. धीरेंद्र बहादुर सिंह के मुताबिक बाबा नागनाथ का पल्स व ब्लड प्रेशर सामान्य है। अल्ट्रासाउंड व सीने की एक्सरे रिपोर्ट में भी कोई मर्ज सामने नहीं आया। सांस की तकलीफ पर उन्हें ऑक्सीजन दी गई है और उन्हें बीएचयू रिफर किया गया, लेकिन वह गए नहीं। उनकी देखरेख के लिए चिकित्सकों की टीम चौबीस घंटे तैनात है।

