कौन हैं हिना रब्बानी खर?


हिना रब्बानी खर ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री पद को उस वक़्त संभाला है जब आने वाले दिनों में देश की विदेश नीति को मुश्किलों का सामना करना है.

जानाकार मानते हैं कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री को जिस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, हिना रब्बानी खर को उसे पूरा करने में काफ़ी दिक़्क़त होगी क्योंकि उनका अनुभव बहुत ही कम है.

लेकिन कुछ जानकार ये मानते हैं कि पाकिस्तान की प्रथम महिला विदेश मंत्री के बतौर उनकी वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि को ओर बेहतर करने में मदद मिल सकती है.

चौंतीस वर्षीय हिना रब्बानी खर एक व्यवसायी हैं और पाकिस्तान के एक मशहूर राजनैतिक परिवार से संबंध रखती हैं.

उन्होंने अमरीका की मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय से होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की है और साल 2003 में राजनीति में क़दम रखा जब उनके पिता ग़ुलाम नूर रब्बानी खर अयोग्य घोषित किए गए थे क्योंकि उनके पास स्नातक की उपाधि नहीं थी.

उन्होंने दक्षिण पंजाब के ज़िले मुज़फ़्फ़राबाद से दो बार चुना जीता. पहले साल 2003 में मुस्लिम लीग (क्यू) के टिकट पर और दूसरा 2008 में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की प्रत्याशी के तौर पर.

'मुशर्रफ़ के दौर में थी मंत्री'

हिना रब्बानी खर को ऐसे समय में विदेश मंत्री पद सौंपा गया है जब पाकिस्तान और भारत के बीच शांति वार्ता चल रही है और कुछ दिनों बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की दिल्ली में मुलाक़ात होगी.

पूर्व सैन्य शासक परवेज़ मुशर्रफ़ के कार्यकाल में जब मुस्लिम लीग (क्यू) ने सरकार का गठन किया तो उन्होंने आर्थिक मामलों की राज्यमंत्री का पद संभाला और 2005 में आए भयंकर भूकंप में अतंरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों के साथ हुई वार्ताओं में उनकी बहुत भूमिका रही.

साल 2008 के चुनावों में जब पीपुल्स पार्टी ने सरकार का गठन किया तो वे मुस्लिम लीग क्यू छोड़ कर पीपुल्स पार्टी में शामिल हो गईं. पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में भी उन्होंने आर्थिक मामलों की राज्यमंत्री का पद संभाला.

हिना रब्बानी खर के लिए विदेश मंत्री का पद बिल्कुल नया है लेकिन वे पिछले पाँच महीनों से विदेश मंत्रालय से जुड़ी हुई थी क्योंकि विदेशी मामलों के राज्यमंत्री का पद उनके पास था.

प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने इसी साल फरवरी में जब अपने मंत्रिमंडल में व्यापक स्तर पर फेर-बदल किया तो उन्होंने शाह महमूद कुरैशी को विदेश मंत्री पद से हटा दिया और हिना रब्बानी खर को विदेशी मामलों की राज्यमंत्री बना दिया.

'बड़ी चुनौतियों का सामना'

हिना रब्बानी खर को ऐसे समय में विदेश मंत्री पद सौंपा गया है जब पाकिस्तान और भारत के बीच शांति वार्ता चल रही है और कुछ दिनों बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की दिल्ली में मुलाक़ात होगी.

अब देखना ये है कि बतौर विदेश मंत्री वे विदेश नीति की मुश्किल चुनौतियों का सामना कर पाएंगी या नहीं.

पिछले कई दशकों से पाकिस्तानी की विदेश नीति सेना के नियंत्रण में है.

विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग नवाज़ के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ ने कुछ दिन पहले कहा था कि भारत, अफ़ग़ानिस्तान और अमरीका के प्रति पाकिस्तान की नीति संसद के नियंत्रण में होनी चाहिए न कि सैन्य अधिकारियों के.

Posted by रवि चौहान at 6:28 pm.

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