महिलाओं के लिए चौथा सर्वाधिक खतरनाक देश है भारत
राष्ट्रीय, विशेष 2:20 pm
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री कृष्णा तीरथ ने गुरुवार को राज्यसभा में बताया कि एक वैश्विक सर्वेक्षण की तथ्यों और कार्यप्रणाली की जानकारी नहीं होने की वजह से इसके निष्कर्षों पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती.
माकपा के मोइनुल हसन के प्रश्न के लिखित जवाब में तीरथ ने कहा कि यह सर्वेक्षण 'ट्रस्ट लॉ' ने किया है जो थॉमसन रायटर्स फाउंडेशन की समाचार सेवा है. सर्वे पांच महाद्वीपों के लिंगभेद मामलों के 213 विशेषज्ञों के नमूनों पर आधारित है.
उन्होंने बताया कि कन्या भ्रूण हत्या और मानव तस्करी रोकने के लिए सरकार ने अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपाय किए हैं तथा बहुद्देशीय कार्यनीति भी बनाई है.
तीरथ ने गुंडू सुधारानी के प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 को 26 अक्तूबर 2006 से प्रभावी किया गया. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार इस अधिनियम के तहत वर्ष 2007 में 5788, वर्ष 2008 में 5643 और वर्ष 2009 में 7802 मामले दर्ज हुए.
पी राजीव के प्रश्न के लिखित उत्तर में तीरथ ने बताया कि वर्ष 2005 से दहेज निरोधक अधिनियम के तहत दर्ज हुए मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है लेकिन 2008 में इनकी संख्या में कमी पाई गई थी. वर्ष 2005 में ऐसे मामलों की संख्या 3204 थी. वर्ष 2006 में दहेज निरोधक अधिनियम के तहत 4504 मामले, 2007 में 5623 मामले, 2008 में 5555 मामले और 2009 में 5650 मामले दर्ज किए गए.
उन्होंने ईश्वर सिंह के प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2007-09 में देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के क्रमश: 185312 मामले, 195856 मामले और 203804 मामले दर्ज किए गए. राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी महिलाओं पर कथित अत्याचार की शिकायतें मिलीं.
एक अप्रैल 2008 से 29 जुलाई 2011 के दौरान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को महिलाओं के खिलाफ अत्याचार की 53711 शिकायतें मिलीं. ज्यादातर शिकायतें पुलिस द्वारा महिलाओं पर किए गए अत्याचार से संबंधित थीं.
उन्होंने बताया कि वर्ष 2009-10 के दौरान राष्ट्रीय महिला आयोग में 15985 शिकायतें दर्ज की गर्इं जो घरेलू हिंसा, वैवाहिक विवाद, दहेज उत्पीड़न, मृत्यु, संपत्ति, बलात्कार तथा पुलिस की उदासीनता से संबंधित थीं.

