देशभर में मनाया जा रहा है नागपंचमी का त्योहार धूमधाम से
आध्यात्म 6:44 pm
उज्जैन, इलाहाबाद, कानपुर समेत देशभर के नाग मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं.
नागपंचमी का त्योहार भारतीय वैदिक परंपरा के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन मनाया जाता है.
वाराणसी के नागकुंड मंदिर, कानपुर के नागेश्वर, इलाहाबाद के कोटेश्वर महादेव मंदिर और उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर में भक्त नागराज को प्रसन्न करने के लिए पहुंच रहे हैं.
नाग पंचमी के इस पर्व को लेकर लोगों में मान्यता है कि वेदों के प्रचलन के साथ ही नागों की पूजा की परंपरा चली आ रही है.
महर्षि पाताल लोक में जाकर साधना किया करते थे. महर्षि को भगवान शेष का अवतार भी माना जाता है.
उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है. नागचंद्रेश्वर मंदिर बाबा महाकाल के शिखर पर विराजमान है. इस मंदिर का पट साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी के अवसर पर ही खुलता है.
मान्यता है कि भगवान राम, लक्ष्मण, माता सीता को ढूंढ़ते हुए महाकाल मंदिर आए थे और नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन किए थे. तभी से लाखों की संख्या में श्रद्धालु नागपंचमी के दिन मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं.
इस दिन महाकाल का दरबार भक्तों के लिए 24 घंटे खुला रहता है और पूरे मंदिर की सजावट भी नाग की आकृति की तरह ही की जाती है.
वहीं, वाराणसी में एक नाग कूप, जिसके प्रति मान्यता है कि इस नाग कूप का पानी पीने से ज्ञान की वृद्धि होती है और असाध्य रोग भी ठीक हो जाते हैं. नाग पंचमी के मौके पर श्रद्धा से सराबोर भक्त इस कुंड के दर्शन के लिए आते हैं.
कानपुर के नयागंज स्थित नागेश्वर मंदिर में भी श्रद्धालु नाग देवता की पूजा अर्चन कर नागदेवता को प्रसन्न कर रहे हैं.
उधर, इलाहाबाद के कोटेश्वर मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है.
मान्यता है कि आज के दिन सर्प देवता को दूध और लावा चढ़ाना मंगलकारी होता है. साथ ही सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

