उत्तर प्रदेश में घाघरा नदी का कोहराम जारी
6:47 pm
तेज बहाव से एल्गिन-चरसारी तटबंध टूटने के बाद अब तक आसपास के 30 गावों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है. बाराबंकी, गोंडा और बहराइच जिलों में घाघरा की तबाही से करीब 30,000 ग्रामीण और उनकी सैकड़ों एकड़ फसल प्रभावित हुई है.
बाराबंकी में घाघरा नदी पर बना एल्गिन-चरसारी तटबंध और बाद में उसके रिंग बांध के टूटने से बाराबंकी और सीमावर्ती गोण्डा जिले के 30 गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है. पानी लगातार अन्य गांवों की तरफ तेजी से जा रहा है.
गोंडा के जिला आपदा अधिकारी मोहम्मद गफ्फार हुमायूं ने गुरुवार को बताया, "नदी के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के पानी के बहाव को देखते हुए करनैलगंज तहसील के 52 गांवों के बाढ़ से प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है. प्रभावित गावों के लोगों को राहत शिविरों में भेजा जा रहा है. राहत कार्य में प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) की तीन प्लाटून मोटरबोट के साथ लगाई गई है."
हुमायूं ने कहा, "खतरे के निशान से करीब 45 सेंटीमीटर ऊपर बह रही घाघरा नदी के जलस्तर को देखते हुए परसपुर-धौरहरा और भिखारीपुर-सकरौर तटबंधों की चौकसी बढ़ा दी गई है. जिला प्रशासन की टीम से लगातार दोनों तटबंधों की निगरानी करने को कहा गया है."
एल्गिन-चरसारी तटबंध टूटने से बाराबंकी जिले के सात गांव प्रभावित हुए हैं. बाराबंकी के अपर जिलाधिकारी (वित्त) देवेंद्र पांडे ने बताया, "अब तक करीब 20,000 प्रभावित लोगों को बाढ़ चौकियों पर बने राहत शिविरों में ले जाया जा रहा है. इन शिविरों में रहने, खाने और दवाइयों की पूरी व्यवस्था की गई है."
वहीं, बहराइच के अपर जिलाधिकारी (वित्त) सुखलाल भारती ने कहा कि महसी और कैसरगंज तहसील के बाढ़ प्रभावित 15 गावों के लोगों को प्रशासनिक मदद मुहैया कराई जा रही है. अगले 24 घंटे के दौरान घाघरा के जलस्तर में कमी आने की उम्मीद है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को किसी तरह की मुश्किल न हो, इसके लिए प्रशासिनक अधिकारियों को डेरा डालने के निर्देश दिए गए हैं.
इस बीच, मौसम विभाग के उत्तर प्रदेश में जारी भारी बारिश का दौर थमने की सम्भावना जताई है, जिससे प्रशासिनक अधिकारियों ने थोड़ी राहत ली है
