अवैध कॉलोनियों को नियमित करने की कवायद बंद की जाए : सुप्रीम कोर्ट
ताजा खबरें, राजनीति, राष्ट्रीय 8:16 am
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देश की राजधानी में अनधिकृत निर्माण को संरक्षण देने वाले कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं का निपटारा होने तक दिल्ली में किसी भी तरह का अवैध निर्माण, अवैध कॉलोनियों को नियमित करने की कवायद बंद की जाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवैध निर्माण या अतिक्रमण के लिए डीडीए,एमसीडी और एनडीएमसी के अफसर जिम्मेदार होंगे.
जस्टिस जीएस सिंघवी और स्वतंत्र कुमार की बेंच के आदेश से दिल्ली सरकार द्वारा 151 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की कवायद खटाई में पड़ सकती है. दिल्ली सरकार 1600 अनधिकृत कॉलोनियों में से 151 को नियमित करने की कोशिश में औपचारिकाताएं पूरी कर रही है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त मॉनिटिरिंग कमेटी से कहा गया है कि अवैध निर्माण की शिकायत अदालत से करे. बेंच ने कहा कि सीलिंग से संबंधित सभी याचिकाओं पर इस साल मार्च में सुनवाई की जाएगी. सुनवाई की तारीख बृहस्पतिवार को तय की जाएगी.
दो महीने बाद होने वाली सुनवाई प्रतिदिन होगी. सुनवाई टालने के आग्रह को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा. केंद्र सरकार ने पिछले माह अनधिकृत निर्माण को संरक्षण प्रदान करने के लिए विशेष कानून तीन साल के लिए बढ़ा दिया. संसद ने इसकी मंजूरी प्रदान कर दी. यह कानून 2006 से लगातार बढ़ाया जाता रहा है. सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा रिहायशी इलाकों में चल रही कॉमर्शियल गतिविधियों की सीलिंग और अवैध निर्माण पर हथौड़ा चलाने का आदेश देने के बाद पैदा हुए माहौल के कारण केंद्र सरकार को विशेष कानून लाना पड़ा था.
हालांकि इस कानून में पुराने निर्माण को संरक्षण प्रदान किया गया है और किसी भी तरह के नए अवैध निर्माण पर पाबंदी है लेकिन इसके बावजूद समूची दिल्ली में अवैध निर्माण पनप रहा है. कोर्ट के आदेश से दिल्ली के पॉश खान मार्केट की पहली मंजिल में कॉमर्शियल गतिविधियों की इजाजत देने की एनडीएमसी की कवायद पर भी विराम लग सकता है. खान मार्केट में भूतल पर ही दुकान चलाने की अनुमति है.
लेकिन इस मार्केट की पहली और दूसरी मंजिल में दफ्तर,दुकान, रेस्तरां, होटल आदि धड़ल्ले से चल रहे हैं. मंगलवार को सुनवाई के दौरान खान मार्केट के व्यापारी बड़ी तादाद में मौजूद थे. मास्टर प्लान 2021 के कई प्रावधानों की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी अदालत मार्च में सुनवाई करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए, एमसीडी और एनडीएमसी से कहा कि वह अवैध निर्माण, अतिक्रमण की निगरानी के लिए अफसर नियुक्त करे.

