अगले पांच साल तक राष्ट्रीय हाकी टीमों का प्रायोजक बना रहेगा "सहारा"
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करार से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि यह करार 2017 तक के लिए किया गया है जिसके तहत भारत की जूनियर और सीनियर टीमों का प्रायोजन शामिल होगा.
उन्होंने वित्तीय ब्यौरा देने से इनकार करते हुए कहा, ‘आंकड़ों का खुलासा फिलहाल नहीं किया जा सकता लेकिन यह पिछले रकम करार से दुगुने से अधिक होगी. करार पांच साल के लिए किया गया है और इसमें भारत की सीनियर पुरूष, महिला और जूनियर टीमें आयेंगी.’
इसकी औपचारिक घोषणा अगले कुछ दिन में कर दी जायेगी. सहारा और भारतीय हाकी का करार 2011 में ही खत्म हो गया था जिसके बाद छह महीने की अतिरिक्त अवधि भी 14 जनवरी को खत्म हो गई थी.
सहारा समूह 2003 में कैस्ट्रोल के पीछे हटने के बाद भारतीय हाकी के साथ जुड़ा था. कैस्ट्रोल 2001 से भारतीय हाकी का प्रायोजक था जिसने लागत में कटौती के लिए नाता तोड़ा. सहारा समूह के चेयरमैन सुब्रत राय सहारा ने जुलाई 2003 में तत्कालीन भारतीय हाकी महासंघ के प्रमुख केपीएस गिल के साथ आठ साल का करार किया था.
सहारा समूह ने तीन दिन पहले ही भारतीय क्रिकेट और आईपीएल से नाता तोड़ते हुए पुणे वारियर्स फ्रेंचाइजी का मालिकाना हक भी छोड़ दिया था. सहारा समूह ने यह रकम दूसरे खेलों और गांवों में बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च करने का ऐलान किया था.
ओलंपिक क्वालीफायर की तैयारी में जुटी भारतीय हाकी को इस घटनाक्रम से संबल मिलेगा और क्वालीफाई करने पर वित्तीय संकट से नहीं जूझना पड़ेगा. भारतीय पुरूष और महिला टीमों को 18 से 26 फरवरी तक ओलंपिक क्वालीफायर खेलने हैं.

