स्वामी रामदेव : कितने सही , कितने गलत

आवाज़ इंडिया,
४ जून की सुबह से शुरू हुई बाबा रामदेव की लीला अब बेहद अप्रिय दौर पर पहुंच चुकी है...


भ्रष्टाचार और काले धन के विरूद्ध चल रहा यह आंदोलन एक 'आवासीय योग विज्ञान प्रशिक्षण एवं अष्टांग योग व्याख्यानमाला शिविर' के बैनर तले चल रहा था...

साध्य के लिये प्रयुक्त साधनों की शुचिता को भी उतना ही महत्व देने के परंपरा वाले हम लोगों में से कईयों को यह बात बहुत ही असहज कर रही थी...
जब इस अनशन की योजना व प्रचार महीनों पहले से चल रहा था तो क्यों नहीं इस बात के लिये निर्धारित जगह की ही अनुमति ली गई... सरकार यदि मना करती तो यह बात जनता के सामने रखी जा सकती थी और अनुमति पाने के लिये उपलब्ध अन्य तरीकों का प्रयोग किया जा सकता था... विडंबना तो देखिये कि रामलीला मैदान को खाली करवाने के लिये प्रशासन ने ठीक इसी तर्क का प्रयोग किया...

पुलिस व प्रशासन अब यह कहता है कि उन्हें योगऋषि रामदेव व उनके एक अन्य सहयोगी की जान के ऊपर खतरे की स्पेसिफिक सूचना मिली थी इसीलिये वह देर रात को उन दोनों लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिये वहाँ गये थे...

यह मान भी लिया जाये कि यह प्रशासन की एक चाल थी फिर भी ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर पद के अधिकारी के रामलीला मैदान पर जा बाबा को यह बताने के बाद जो हुआ वह टीवी कैमरों ने दुनिया को दिखाया...
बाबा योगऋषि रामदेव ने झटके से हाथ छुड़ाया, स्टेज के एक कोने तक गये जहाँ से उनके अति उत्साही समर्थकों ने उनको मंच से नीचे समर्थकों की भीड़ के बीचों-बीच कुदवा दिया... योगऋषि एक भक्त के कंधों पर बैठ जन-समूह को संबोधित करने लगे...

उनकी महिला समर्थकों ने उनके चारों ओर घेरा सा बना लिया... इसके बाद योगऋषि के कथन के अनुसार ही भयातुर हो वह स्टेज के नीचे या पीछे कहीं काफी देर छुपे रहे व महिला के वस्त्रों में चेहरे व बालों को ढके हुऐ रामलीला मैदान से बाहर निकल जाने के प्रयत्न में पुलिस के कब्जे में आ गये...

शाम को प्रेसवार्ता में योगॠषि ने कहा कि उन्होंने यह सब इसलिये किया कि उनको यह अंदेशा था कि सरकार-पुलिस या तो उनको गायब कर देती या उनका एनकाउंटर कर देती... उनका यह भी कहना था कि जिस पुलिस ने उनको एयरपोर्ट पहुंचाया वह तो अच्छी थी परंतु जो पंडाल के अंदर उनको लेने आई थी वह कतई दुष्ट थी...

सवाल यह है कि क्या पल-पल की खबर को लाईव प्रसारित करते हुऐ इलेक्ट्रानिक मीडिया की मौजूदगी में ऐसा संभव था ?... क्या इतने उच्च पुलिस अधिकारी की बात पर विश्वास नहीं किया जाना था...
योगऋषि के जिन रणनीतिकारों, सलाहकारों व खबर देने वालों ने उनके मस्तिष्क में इस तरह का भय पैदा किया या इन विचारों के बीज बोये वह आंदोलन के बहुत बड़े दुश्मन थे...


इस पूरे आंदोलन में दूसरी पंक्ति के नेतृत्व का अभाव है... योगऋषि के यों मंच छोड़ छिप जाने से नेतृत्वहीन हो चुकी भीड़ ने भी आपा खोया और मौके पर मौजूद पुलिस बल ने वही किया जिसके लिये वह कुख्यात है... सभी को शुक्र मनाना चाहिये इस बात का कि पचास हजार से अधिक की इस भीड़ के बीच मची भगदड़,

दोनों ओर से चल रही ईंट-पत्थरबाजी, फूटते आंसू गैस के गोलों व पंडाल के एक हिस्से में लगी आग के बीच कोई बड़ी जन-हानि नहीं हुई... पुलिस बल ने जो कुछ किया कैमरों ने लाइव दिखाया... जिस किसी भी अधिकारी या जवान ने किसी भी महिला-पुरूष-बच्चे पर अनावश्यक व अनुचित बल प्रयोग किया हो तो न्याय का तकाजा है कि उसे चिन्हित कर कड़ी से कड़ी सजा मिले...

योगऋषि ने ठीक ही कहा है कि वह इस पूरे मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ले जायेंगे... उम्मीद कीजिये कि आयोग से सभी को न्याय व दोनों पक्षों के दोषियों को सजा मिलेगी...


यह तो थी रात की बात... शाम को हुआ यह कि योगऋषि ने सभी की उपस्थिति में घोषणा की कि सरकार ने उनकी सारी बातें मांग ली हैं... लगभग ठीक उसी समय केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने आचार्य बालक़ृष्ण द्वारा हस्ताक्षरित एक कागज मीडिया को दिखाया जिसमें उन्होंने चार तारीख शाम को अनशन खत्म करने व छह तारीख तक तप करने के बारे में लिखा था...

मीडिया तुरंत पूरे मामले को पहले से फिक्स कह योगऋषि की आलोचना करते हुऐ चीखने सा लगा... इसका पता चलते ही योगऋषि ने मंत्री कपिल सिब्बल व सरकार पर विश्वासघात का आरोप लगाते हुऐ अनशन को जारी रखने
का निर्णय ले लिया...


अब पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार पहुंच योगऋषि ने अपने अनशन को जारी रखने व शीघ्र ही दिल्ली या दिल्ली के आसपास किसी जगह जा अनशन जारी रखने संबंधी बयान दिया है (हालांकि उनकी इस मनसा पर उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने पनि फेर दिया)... पर इसबार का यह अनशन क्या पहले सा प्रभाव रखेगा इसमें संदेह है...

कांग्रेस के कुछ पदाधिकारियों ने योगऋषि की आलोचना व उन पर हमले करते हुऐ मर्यादा का उल्लंघन किया है उन्हें यह याद रखना चाहिये कि यह देश एक सन्यासी के प्रति ऐसी भाषा के प्रयोग को कभी माफ नहीं करेगा...

कुल मिलाकर यही कि इस पूरे प्रकरण ने योगऋषि के कद व उनके प्रभाव को कम किया है, अब उनकी हर बात में पहले सा वजन शायद ही आ पायेगा ...

इस बार तो सभी के सम्मुख दिखलाये अपने नेतृत्व से आपने निराश ही किया है हर किसी को योगऋषि रामदेव जी...

Posted by गजेन्द्र सिंह at 8:39 am.

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