बाबा रामदेव भी अब शांति से नहीं बैठ सकते, होगी सम्पत्ति की जांच

नई दिल्ली। बाबा रामदेव के करीबी सहयोगी आचार्य बालकृष्ण 4 जून को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई झड़पों के बाद से गायब हैं। सूत्रों के अनुसार सरकार उनके तथाकथित जाली पासपोर्ट की जांच करेगी और अगर अप्रवासन विभाग शिकायत दर्ज करवाता है, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।

बाबा रामदेव भी अब शांति से नहीं बैठ सकते, क्योंकि सरकार उनकी सम्पत्ति की भी जांच करने की तैयारी कर रही है।
योग गुरु से राजनीति में आने और एक बड़ा व्यवसायी बनने की ओर कदम बढ़ाते रामदेव की राह अब इतनी आसान नहीं रह गई है।

जबसे बाबा रामदेव ने सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार खत्म करने और काला धन वापस स्वदेश लाने के लिए मोर्चा खोला है, तबसे उनके योग और औषधि साम्राज्य और उससे बनी अकूत सम्पत्ति पर भी उंगली उठने लगी है।
सरकारी सूत्रों द्वारा ‘सीएनएन-आईबीएन’ को दी गई जानकारी से रामदेव और उनके साथियों की कई कम्पनियों का खुलासा हुआ है, हालांकि उनके खिलाफ किसी तरह की धांधली के आरोप नहीं हैं, लेकिन सरकार ने उनके आयकर का लेखा-जोखा हासिल कर लिया है।

इस जानकारी से खुलासा होता है कि रामदेव के विश्वासपात्र आचार्य बालकृष्ण और मुक्ता आनंद आस्था टीवी जैसे प्रसारण से लेकर खाद्य उद्योग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 200 कम्पनियां चलाते हैं।
दूसरी ओर कई हिंदू आध्यात्मिक संतों ने भी मांग की है कि रामदेव की अकूत सम्पत्ति की जांच होनी चाहिए। पुरी के शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद तीर्थ ने कहा है कि रामदेव के पास करोड़ों की भूमि और सम्पत्ति है और इसकी जांच होनी चाहिए।

बालकृष्ण की राष्ट्रीयता का सवाल भी उठाया जा रहा है,
कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह के अनुसार बालकृष्ण नेपाली नागरिक हैं और उन्होंने वहां कई अपराध किए हैं और भागकर भारत आए हैं। उनका पासपोर्ट भी नेपाली है। वैसे एक खबर यह भी है कि अमेरिका ने रामदेव के उत्पादों को अपने यहां बेचने की अनुमति नहीं दी है।

अमेरिकी खाद्य विभाग का आरोप है कि उनके उत्पादों की प्रामाणिकता साबित नहीं हुई है और वे गलत प्रचार कर अपने उत्पाद बेच रहे हैं।
उधर, स्वाथ्य मंत्रालय ने भी कहा है कि अब वह रामदेव के औषधि व्यवसाय की जांच करेगा। “यह मुद्दा खत्म होने के बाद हम इस मामले पर अलग से ध्यान देंगे।” स्वाथ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा।

बाबा रामदेव इससे पहले भी कई विवादों में घिर चुके हैं। सन 2006 में उन पर सरकारी जमीन हड़पने का आरोप लगा था। ‘सीएनएन-आईबीएन’ ने खबर दी थी कि रामदेव की पतंजलि योगपीठ ने सरकारी भूमि हथिया ली है। अब रूड़की प्रशासन ने यह माना है कि रामदेव ने 2.98 हेक्टेयर भूमि हड़प ली है।

इसी तरह की एक अन्य घटना में जब दिव्य योग ट्रस्ट पर जमीन हथियाने का आरोप लगा, तो आचार्य बालकृष्ण ने कहा था कि यह सवाल पूछने वाले आप कौन होते हैं...आप खुद को क्या समझते हैं? बाबा रामदेव द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद से उनके खिलाफ भी आरोपों और भ्रष्टाचारों की झड़ी लग गई है।

पिछले आठ बरसों में अचानक खड़े हुए उनके साम्राज्य पर अब सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। कहा जा रहा है कि उनका यह साम्राज्य 1,100 करोड़ रुपए का है और इस पर बहुत-सी भूमि हड़पने का आरोप है।

लेकिन क्या सरकार ऐसे समय में बाबा के योग व औषधि साम्राज्य पर उंगली उठाएगी और उसकी जांच करेगी, जब बाबा ने उसकी नाक में दम कर रखा है? यह सवाल काफी मायने रखता है।

Posted by गजेन्द्र सिंह at 9:44 pm.

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