प्रख्यात चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन का लंदन में निधन

मशहूर चित्रकार एमएफ हुसैन का लंदन के रॉयल ब्राम्पटन अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया है वो काफी समय से बीमार चल रहे थे.

प्रख्यात चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन का गुरुवार तड़के लंदन में निधन हो गया. वह 95 साल के थे.

सिनेमा के होर्डिग्स की चित्रकारी करने वाले हुसैन बाद में दुनिया के महान चित्रकारों की जमात में शामिल हो गए थे.

हिंदू कट्टरपंथियों द्वारा निशाना बनाए जाने के बाद वह देश से बाहर आत्म-निर्वासन में रह रहे थे.

सूत्रों के मुताबिक हुसैन बुढ़ापे की बीमारियों से जूझ रहे थे, अस्पताल में उन्हें दिल का दौरा पड़ा था. उन्हें भारत में नहीं बल्कि लंदन में ही दफनाया जाएगा.

निधन के समय उनके बेटे व बेटी उनके नजदीक ही मौजूद थे.

हुसैन की बनाई हिंदू देवियों की आपत्तिजनक तस्वीरों के चलते उनके काम पर हमले होने लगे थे और हिंदूवादी संगठनों ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायतें दर्ज कराई थीं.

इसके बाद हुसैन ने भारत छोड़ दिया. उन्होंने 2010 में कतर की नागरिकता ग्रहण कर ली.

हुसैन का जन्म मध्य प्रदेश के पंढरपुर में 17 सितम्बर, 1915 को हुआ था. उनकी मां का नाम जुनैब व पिता का नाम फिदा था. जब वह सुलेख सीख रहे थे तभी पहली बार चित्रकारी से उनका परिचय हुआ.

वह एक कलाकार बनने के लिए 20 साल की उम्र में ही मुम्बई चले गए थे और उन्होंने जीवनयापन के लिए शुरुआत में सिनेमा के होर्डिग्स पेंट किए.

1935 में उन्होंने जेजे स्कूल ऑफ आर्टस में दाखिला लिया.

बतौर चित्रकार हुसैन को 40 के दशक में ख्याति मिलनी हासिल हो गई थी और 1952 में ज्यूरिख में उनकी पेटिंग्स की एकल प्रदर्शनी आयोजित की गई और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान बनने लगी.

1967 में हुसैन ने अपनी पहली पेंटिंग "थ्रू द आइज ऑफ ए पेंटर" बनाई थी. बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित इस पेंटिंग को गोल्डन बीअर पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

1996 में हिन्दू देवी-देवताओं को लेकर बनाई गई उनकी कुछ पेटिंग्स पर काफी बवाल मच गया था.

माधुरी दीक्षित के साथ उन्होंने गज़गामिनी फिल्म का निर्माण भी उन्होंने किया था.

हुसैन की आत्मकथा "द मेकिंग ऑफ ए पेंटर" पर एक फिल्म बनाई जा रही है.

1966 में उन्हें पद्दमश्री से नवाज़ा गया था और 1973 में में पद्दभूषण से सम्मानित किया गया था.1991 में हुसैन पद्म विभूषण से सम्मानित किए गए.

हुसैन 2006 से लंदन में रह रहे थे,सन 2010 में उन्होंने कतर की नागरकिता ले ली थी. फोर्ब्स मैगजीन ने हुसैन को भारत का पिकासो कहा था.

एमएफ हुसैन के निधन पर कला जगत और उनके प्रशंसकों में निराशा की लहर है.

मशहूर अभिनेत्री शबाना आज़मी ने कहा है कि हुसैन साहब का निधन कला जगत के लिए अपूर्णनीय क्षति है.

उन्होंने कहा कि हुसैन साहब से उनकी अक्सर बातचीत होती रहती थी और वो हिंदुस्तान आने को बहुत बैचेन थे उनमें भारत की मिट्टी की सुगंध थी.

ऐसे कलाकार को हिंदुस्तान से दूर रहना पड़ा ये बेहदज अफसोसज़नक है.

प्रख्यात लेखक राजेंद्र यादव ने कहा कि पेंटिंग जगत के दिग्गज़ का निधन हो गया है.

वहीं मशहूर गज़ल गायक जगजीत सिंह ने कहा कि हुसैन साहब के निधन से उन्हें झटका लगा है.

Posted by गजेन्द्र सिंह at 4:53 pm.

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