हुसैन के निधन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ने शोक जताया
दुनिया 4:58 pm
सिनेमा के होर्डिंग्स की चित्रकारी करने वाले हुसैन बाद में दुनिया के महान चित्रकारों की जमात में शामिल हो गए थे। हिंदू कट्टरपंथियों द्वारा निशाना बनाए जाने के बाद वे देश से बाहर आत्म-निर्वासन में रह रहे थे। सूत्रों के मुताबिक हुसैन वृद्धावस्था के कारण बीमारियों से जूझ रहे थे। अस्पताल में उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। उन्हें लंदन में ही दफनाया जाएगा। निधन के समय उनके बेटे व बेटी उनके पास मौजूद थे।
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने प्रख्यात चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, "हुसैन विश्व विख्यात कलाकार थे, समकालीन चित्रकला में उनकी असाधारण शैली ने उन्हें मशहूर बनाया। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे और उनके निधन से विश्व कला जगत में उनकी कमी महसूस की जाएगी।"
उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने भी हुसैन के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हुसैन का निधन देश और कला समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति है।
उपराष्ट्रपति ने अपने शोक संदेश में कहा कि हुसैन का नौ दशक से ज्यादा का जीवन कला समुदाय के लोगों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करने वाला रहा। हुसैन साहब ने महत्वपूर्ण हस्तियों, विविध घटनाओं के अलावा जीवन के विभिन्न रंगों को अपनी कृतियों में उकेरा। उनका निधन देश और कला समुदाय के लिए बड़ी क्षति है।
उन्होंने कहा, "हुसैन के निधन का समाचार सुनकर मुझे बेहद दुख हुआ, वे अपने समय के महान कलाकार रहे। उन्होंने अधिक से अधिक भारतीयों के लिए आधुनिक कला प्रस्तुत की। चित्रकला और अन्य कलाओं में सफलताएं प्राप्त करने के अलावा वे राष्ट्र के विकास के क्रम के भी दृष्टा रहे और यही उनके चित्रों में प्रतिबिम्बित हुआ।"
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हुसैन के निधन पर शोक जताते हुए इसे राष्ट्रीय क्षति बताया। निधन का समाचार सुनने पर प्रधानमंत्री ने कहा, "यह राष्ट्रीय क्षति है।"
हुसैन की बनाई हिंदू देवियों की आपत्तिजनक तस्वीरों के कारण उनके काम पर हमले होने लगे थे और हिंदूवादी संगठनों ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायतें दर्ज कराई थीं। इसके बाद हुसैन ने भारत छोड़ दिया। उन्होंने 2010 में कतर की नागरिकता ग्रहण कर ली।
हुसैन का जन्म मध्य प्रदेश के पंढरपुर में 17 सितम्बर, 1915 को हुआ था। उनकी मां का नाम जुनैब व पिता का नाम फिदा था। जब वे सुलेख सीख रहे थे तभी पहली बार चित्रकारी से उनका परिचय हुआ।
वे एक कलाकार बनने के लिए 20 साल की उम्र में ही मुम्बई चले गए थे और उन्होंने जीवनयापन के लिए शुरूआत में सिनेमा के होर्डिंग्स पेंट किए।

