गायब आचार्य बालकृष्ण देश के सामने आए
राजनीति 8:55 pm
दिल्ली के रामलीला मैदान पर बाबा रामदेव के अनशन पर हुई कार्रवाई के दिन से गायब आचार्य बालकृष्ण देश के सामने आए.
बालकृष्ण ने रूहासे होकर कहा कि चार जून को कांग्रेस ने सत्ता का दुरूपयोग किया है.
कांग्रेस की कार्रवाई से लोकतंत्र कलंकित हुई है. हम किसी पार्टी के साथ नहीं हैं.
बालकृष्ण ने कहा कि चार जून को मैने स्वामी रामदेव को रामलीला मैदान से जाने को कहा क्योंकि पुलिसवालों की मंशा रामदेव को मारने की लग रही थी और मै वहीं रह गया ताकि सारे अनुयायी वहां से निकल जाएं.
इसके बाद मुझे भी डंडों की मार पड़ी मेरा पूरा बदन दर्द के मारे कराह रहा है.
इस हाथापाई में मेरे वस्त्र भी कहीं छूट गये और वहां से भागते हुए मैने एक लड़के से तौलिया लेकर बांधा और भटकता रहा.
उनके चार जून के बाद से गायब रहने के सवाल पर वह बोले की मैं दिल्ली में ही था.क्योंकि मुझे बताया गया था कि बाहर आने पर मुझे गिरफ्तार भी किया जा सकता है.
नेपाली नागरिकता के मुद्दे पर बालकृष्ण ने कहा, 'मेरा जन्म भारत में हुआ और जवाहर लाल नेहरू के समय हुई भारत-नेपाल संधि 1950 के अनुसार भारतीय संविधान के अनुरूप मैं और मेरे जैसे डेढ़ करोड़ लोग भारतीय नागरिकता रखते हैं।' बालकृष्ण ने कहा कि उनके माता-पिता नेपाली थे लेकिन उनका जन्म भारत में हुआ और पढ़ाई-लिखाई भी उन्होंने यहीं की।नागरिकता के सवाल पर वह बोले कि मै भारतीय हूं और भारत के लिए ही काम करूंगा।
बाबा रामदेव के करोड़ों के साम्राज्य का कामकाज देखने वाले बालकृष्ण ने यहां पतंजलि योगपीठ में संवाददाताओं से कहा कि पुलिस की क्रूरतापूर्ण कार्रवाई में चोटिल हुए अनेक लोगों की दुर्दशा देखकर उन्होंने तय किया कि रामदेव को दिल्ली से हरिद्वार भेजने के बाद वह तब तक दिल्ली में रहेंगे जब तक चोटिल लोगों का इलाज नहीं होता।
उन्होंने कहा, 'उस दिन पंडाल का दृश्य देखकर मैंने कहा कि मैं तब तक पंडाल से नहीं जाऊंगा जब तक कोई भी भाई-बहन पंडाल में रहेगा।' पुलिसिया कार्रवाई में खुद के पैर, सिर पर चोट के साथ गले में भी परेशानी होने का दावा करते हुए बालकृष्ण ने बताया कि वह पंडाल में छिपते रहे और बाद में दिल्ली की सड़कों पर भटकते रहे। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान से निकलते वक्त उनके शरीर पर कपड़े नहीं थे और एक युवक से तौलिया लेकर उसे लपेटकर निकले।

