अंदर की कहानी: बाबा की वादाखिलाफी और एक फोन कॉल के बाद शुरू हुआ ऑपरेशन
राजनीति 9:39 am
नई दिल्ली. बाबा रामदेव के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई का फैसला सरकार ने सिर्फ एक फोन कॉल के बाद ले लिया था। यह फोन कॉल रामदेव से बात कर रहे मंत्रियों - कपिल सिब्बल और सुबोध कांत सहाय - के एक दूत की ओर से गया था।
हालांकि इससे पहले खुफिया एजेंसियों ने यह रिपोर्ट दी थी कि रामलीला ग्राउंड में 5000 लोगों के लिए योग शिविर आयोजित करने की इजाजत है, लेकिन वहां 30 हजार से भी ज्यादा लोग जुटने वाले हैं। ऐसे में इजाजत रद करने और पुलिस कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया गया था, लेकिन 4 जून को एक फोन कॉल के बाद इसकी हरी झंडी तत्काल मिल गई।
शनिवार को रात करीब 11.15 बजे रामलीला मैदान में मौजूद केंद्र सरकार के प्रतिनिधि ने अपने सेलफोन से कॉल किया। दूसरी ओर से सिब्बल और सहाय इस कॉल को सुन रहे थे। उन्होंने बाबा रामदेव के सहयोगियों को यह कहते हुए सुना कि इसे (सरकार की ओर से भेजी चिट्ठी) छोड़ो, हमारी लड़ाई जारी रहेगी। यह सुनते ही गृह मंत्रालय को फोन किया गया और दिल्ली पुलिस रामलीला मैदान में 'महाभारत' के लिए तैयार हो गई।
उधर, बाबा रामदेव के एक सहयोगी ने भी ऐसा दावा किया है, जिससे बाबा के खेमे की नीयत पर शक होता है। बाबा के एक सहयोगी देवेंद्र शर्मा ने एक टीवी चैनल पर अब खुलासा किया है कि आचार्य बालकृष्ण के हाथों लिखा गया समझौता पत्र सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था, क्योंकि यदि ऐसा पत्र नहीं दिया जाता तो सरकार बाबा का अनशन शुरु ही नहीं होने देती। उन्होंने कहा कि इस पत्र का अर्थ सरकार से किए गए वायदे को माना जाना बिलकुल नहीं था।
उन्होंने कहा कि हमें लग रहा था कि 3 जून को होटल में मंत्रियों से हुई बातचीत के तत्काल बाद हमें गिरफ्तार कर लिया जाएगा या फिर हमें आधी रात को हिरासत में लिया जाएगा। सरकार आंदोलन चलने देने के पक्ष में बिलकुल नहीं थी और इसीलिए यह रणनीति बनानी पड़ी।

