तहव्वुर हुसैन राणा हमलों में सहयोग के आरोप से बरी
दुनिया, राजनीति, विशेष 1:59 pm
अमेरिका की एक अदालत ने मुंबई हमलों के मामले में आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा को हमलों में सहयोग करने के आरोप से बरी कर दिया.
शिकागो से प्राप्त एक समाचार के अनुसार उसे लश्कर-ए-तय्यबा को साज-ओ-सामान उपलब्ध कराने और डेनमार्क में एक आतंकवादी साजिश में मदद करने का दोषी ठहराया गया है.
राणा पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है और मुंबई हमलों में डेविड कोलमन हेडली के साथ सह आरोपी था. मुंबई हमलों में 160 से ज्यादा लोग मारे गए थे, जिसमें छह अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे.
12 सदस्यीय ज्यूरी ने दो दिन के विचार-विमर्श के बाद इस फैसले की घोषणा की.
अमेरिकी न्याय विभाग के एक वक्तव्य में कहा गया है कि राणा को दो आरोपों के मामले में 30 साल की अधिकतम सजा हो सकती है और उसे बिना मुचलके के हिरासत में रखा जा सकता है. अब तक सजा सुनाए जाने की तारीख तय नहीं हुई है.
इस फैसले की घोषणा अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज न्यायमूर्ति हैरी डी लिनेनवीबर ने की.
न्याय विभाग के प्रवक्ता रैंडेल सैम्बोर्न ने बताया, ‘‘संघीय अदालत की ज्यूरी ने राणा को डेनमार्क में आतंकवादी साजिश के लिए साज-ओ-सामान उपलब्ध कराने और लश्कर-ए-तय्यबा को साज-ओ-सामान मुहैया कराने के आरोप में दोषी ठहराया है . उसे मुंबई हमलों की साजिश में साज-ओ-सामान उपलब्ध कराने का दोषी नहीं ठहराया गया .’’
राणा फैसला सुनने के बाद स्तब्ध रह गया.
तीन सप्ताह तक चली सुनवाई
शिकागो की अदालत में तीन सप्ताह तक चली सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया गया है.
अभियोजकों ने आरोप लगाया कि राणा को मुंबई हमलों के बारे में जानकारी थी और वह आतंकवादी गुटों और पाकिस्तान में उनके नेताओं के संपर्क में था.
'हेडली ने झूठ बोला'
दूसरी ओर राणा के एटॉर्नी ने कहा कि हेडली ने हर बार झूठ बोलकर राणा को बेवकूफ बनाया.
पाकिस्तानी मूल का अमेरिकी नागरिक हेडली मुकदमे के दौरान सरकारी गवाह था.
हेडली ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ एक समझौता कर लिया था, जिसके तहत उसे दूसरे संदिग्धों के खिलाफ गवाही देनी थी. इस समझौते के तहत ऐसा किए जाने पर उसे न तो मौत की सजा दी जाती और न ही भारत, पाकिस्तान या डेनमार्क प्रत्यर्पित किया जाता.

