कभी सोहरत की बुलंदी, लेकिन आज गुमनाम जिंदगी


दुनिया बड़ी बेदर्द है। जब तक ग्लैमर है तब तक सब साथ खड़े दिखते हैं। पैसा खत्म और तमाशा खत्म। खासकर मुंबई में तो छल, उपेक्षा, अकेलेपन और पागलपन के ढेर सारे किस्से भरे पड़े हैं। ताजा मामला राजकिरण का है।

फिल्मी दुनिया कितनी बेवफा और स्वार्थी होती है, इसका उदाहरण है राज किरण की असली कहानी।
अभिनेता राजकिरण का पता चल गया है। 70 और 80 के दशक की फिल्मों का सितारा गुमनाम ज़िंदगी जी रहा है।
अमेरिका के किसी अस्पताल में मज़दूरी कर अपने इलाज का खर्चा भी उठा रहा है। दीप्ति नवल और ऋषि कपूर ने राजकिरण को खोज निकाला है।

हिप हिप हुर्रे का ये वह टीचर था जिसने बिगड़ैल छात्रों को सही दिशा देकर मजबूत फुटबॉल टीम में तब्दील कर दिया। लेकिन परदे का यह टीचर
रीयल लाईफ में नए स्टूडेंट की तरह लड़खड़ा गया।

अर्थ जैसी सार्थक व गंभीर फिल्म में काम कर चुके राज किरण पिछले दस सालों से अमरीका के अटलांटा स्थित एक पागलखाने में भर्ती है। सबसे हैरानी की बात तो यह है कि इस मुश्किल घड़ी में उनके अपनों ने ही साथ छोड़ दिया है। इन दस सालों के दौरान राज किरण की मौत की भी खबर उड़ी। यह अफवाह खुद राज किरण के दोस्तों ने ही उड़ाई लेकिन सुभाष घई की फिल्म कर्ज में राज किरण के साथ काम कर चुके ऋषि कपूर को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ और उन्होंने राज किरण का पता लगाने का फैसला किया।

कपूर को हालिया अमरीकी यात्रा के समय राज किरण के बारे में पता चला। जब ऋषि कपूर राज किरण के भाई गोविंद मेहतानी से मिले तो पता चला कि राज अटलांटा के पागलखाने में भर्ती है। सूत्रों के मुताबिक किरण राज को उनकी पत्नी और बेटे ने धोखा दिया था। तब से वह डिप्रेशन में चले गए थे। बॉलीवुड के सितारों के इस तरह के हश्र का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहल परवीन बॉबी का भी यही हाल हुआ था। डिप्रेशन की शिकार परवीन की लाश उनके घर से मिली थी।

पिछले डेढ़-दो दशकों से बॉलीवुड में किसी को भी इस शानदार अभिनेता राज किरण की खोजखबर नहीं थी। उनके करीबी दोस्त भी यह मानने लगे थे कि वह अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन उनके करीबी मित्र ऋषि कपूर और कई फिल्मों में राज के साथ अभिनय कर चुकीं दीप्ति नवल को भी इस पर यकीन नहीं था। उन्‍होंने सोशल वेबसाइट फेसबुक पर एक संदेश जारी किया जिसमें उन्होंने लिखा, 'फिल्मी दुनिया के दोस्त की तलाश है।

उनका नाम राज किरण है। हमें उनकी कोई खबर नहीं है। आखिरी बार उनके बारे में यह सुना था कि वह न्यूयॉर्क में कैब चला रहे हैं। अगर किसी के पास कोई जानकारी है तो आपसे गुजारिश है कि हमें बताइए।' अब मीडिया में आई खबर के मुताबिक पिछले दिनों अमेरिका गए ऋषि को उनका पता चल गया है।

ऋषि कपूर बोले, 'मैं यही सोच रहा था कि राज कहां चला गया? यह सवाल मुझे बारबार परेशान कर रहा था। मैंने राज किरण को खोजने के लिए उनके बड़े भाई गोविंद मेहतानी से संपर्क साधने का फैसला किया। इसके बाद मुझे राज किरण के अटलांटा में होने का पता चला। लेकिन मुझे इस बात पर तसल्ली हुई कि वह जिंदा है।

लेकिन राज को एक मानसिक रोग अस्पताल तक सीमित कर दिया गया है। सबसे ज़्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि उनके परिवार ने भी कमोबेश उन्हें छोड़ दिया है।' ऋषि के मुताबिक राज अपने इलाज का खर्चा खुद उठाते हैं। इसके लिए वह अस्पताल में ही काम करते हैं। ऋषि ने कहा, 'राज मुझसे उम्र में छोटे हैं, लेकिन मैंने उनके साथ खाली वक्त में खूब मस्ती की है। मैं उनकी कमी महसूस करता हूं।'

बॉलीवुड में राज किरण को जानने वाले मानते हैं कि राज को उनकी पत्नी और बेटे ने छोड़ दिया था। यह मानसिक झटका राज बर्दाश्त नहीं कर पाए। उनका मूड बहुत तेजी से बदलता था और उनका इलाज काफी महंगा होने के चलते लगता है कि परिवार उनका साथ नहीं दे पाया। राज किरण ने घरेलू मुश्किलों के पूरे सिलसिले का सामना किया और अवसाद भरी जिंदगी जीने के लिए मजबूर हो गए।

उनके परिवार में उनके बड़े भाई गोविंद और छोटा भाई अजीत हैं। लेकिन दोनों ही उनके संपर्क में नहीं हैं। जब ऋषि ने गोविंद से राज का फोन नंबर मांगा तो उन्होंने कहा कि उनके पास नंबर नहीं है।

ऋषि ने कहा, 'मैं फोन पर राज से बात करना चाहता था। लेकिन अब मैं खुद अमेरिका जाऊंगा और उनसे घर लौटने को कहूंगा।' ऋषि कपूर राज किरण को मुंबई वापस लाना चाहते हैं और उनकी फिल्मों में वापसी भी कराना चाहते हैं। इस बारे में उन्होंने कहा, 'मैं चाहता हूं कि राज को पता चले कि मैं उनकी फिक्र करता हूं। मैं खुद उन्हें रोल दिलाने की कोशिश करूंगा।'

राज किरण के करीबियों का मानना है कि राज बॉलीवुड में काम नहीं कर रहे थे, लेकिन उन्होंने अच्छा निवेश कर रखा था, जिसके चलते उन्हें बीमारी के दौरान आर्थिक दिक्कतों का कम सामना करना पड़ा। राज किरण की यादगार फिल्में कागज की नाव, घर हो तो ऐसा, कारण, कर्ज और अर्थ हैं। लापता होने से पहले उन्होंने सुभाष घई, महेश भट्ट और बी आर इशारा जैसे फिल्मकारों के साथ काम किया था।

कहते हैं कि कुछ घरेलू और कुछ प्रोफेशनल लाइफ की नाकामी ने राजकिरण को इस म़ुकाम तक पहुंचाया। राजकिरण को लेकर अर्थ जैसी फिल्म बना चुके महेश भट्ट के लिए परवीन बॉबी के बाद इस ढंग का ये दूसरा किस्सा है।

बताया जाता है कि अमेरिका से पहले मुंबई में भी राजकिरण एक मेंटल इंस्टीटूट में रहे। 'कागज़ की नाव' और 'घर हो तो ऐसा' जैसी फिल्में दे चुके अभिनेता की नाव ऐसी मंझधार में होगी ये शायद ही किसी ने सोचा होगा।

Posted by गजेन्द्र सिंह at 5:28 pm.

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