नई दिल्ली : देश में छुपे दुश्मनों से लड़ेंगे अन्ना
राजनीति 7:08 pm

नई दिल्ली, आँखों देखी संवाददाता : समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा है कि केंद्र सरकार ने लोकपाल बिल के मुद्दे पर युवाओं और देशवासियों को बेवकूफ बनाया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पाकिस्तान के साथ जंग लड़ी थी और अब देश के अंदर रहने वाले दुश्मनों के खिलाफ जंग छेड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वे मौत से नहीं डरते और अंतिम सांस तक लड़ते रहेंगे।
इसी बीच लोकपाल बिल ड्राफ्ट कमेटी के सिविल सोसायटी के सदस्य संतोष हेगड़े ने कहा है कि सिविल सोसायटी सदस्यों में कोई मतभेद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि अन्ना हजारे 16 अगस्त से अनशन पर जाते हैं तो वे उनका पूरा समर्थन करेंगे। हालांकि शनिवार को हेगड़े ने अन्ना को सुझाव दिया था कि वे अब लोकपाल बिल के मुद्दे पर अनशन न करें।
एक इंटरव्यू में अन्ना हजारे ने कहा कि जिन लोगों के हाथों में सत्ता है वे तानाशाह की तरह व्यवहार कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्रियों द्वारा यह आरोप लगाने, कि अन्ना तानाशाह के रूप में काम कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि वे एक मंदिर में छोटे से कमरे में रहते हैं। वे तानाशाह कैसे हो सकते हैं। अन्ना के साथी अरविंद केजरीवाल ने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधि मानते हैं कि उन्हें पांच साल तक लोगों को लूटने का लायसेंस मिल गया। उन्होंने कहा कि यदि मजबूत लोकपाल बिल बना, तो कई लोग जो बिल बनाने का काम कर रहे हैं, जेल जाएंगे। और इसीलिए वे अपने सुसाइड नोट पर हस्ताक्षर करने से बच रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार शुरु से ही षडयंत्र करती रही और मजबूत लोकपाल बिल लाने का उनका कोई उद्देश्य नहीं था। सरकार में इतना घमंड है कि वे मानते हैं कि वे जो चाहे कर सकते हैं।
अन्ना ने कहा कि देश को अभी भी पूरी तरह आजादी नहीं मिली है। अन्ना ने कहा कि वे चाहते हैं कि देश भ्रष्टाचार से मुक्त हो और इसीलिए आजादी की दूसरी लड़ाई छेड़ने का वक्त आ गया है। उन्होंने कहा कि पहले लोकपाल बिल के संसद में पेश होने के समय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने खुद बिल के दायरे में प्रधानमंत्री को रखे जाने की वकालत की थी। लेकिन अब सरकार इस मुद्दे पर पीछे हट रही है।
कल से लोकपाल बिल ड्राफ्ट कमेटी की बैठक
सरकार और गांधीवादी अन्ना हजारे पक्ष के बीच बातचीत लगभग टूटने की कगार पर पहुंचने के बाद लोकपाल मसौदा समिति की सोमवार और मंगलवार को फिर बैठक होगी, ताकि दोनों पक्षों के बीच गंभीर मतभेदों को दूर करने की आखिरी कोशिश की जा सके।
समिति की 20 और 21 जून को बैठक करने का फैसला इसलिए किया गया ताकि लोकपाल के बुनियादी मुद्दों पर अत्यधिक मतभेद कम करने की एक और कोशिश की जा सके। हजारे पक्ष की ओर से कर्नाटक के लोकायुक्त संतोष हेगड़े इन बैठकों में शामिल नहीं होंगे।
हालांकि, बैठकों को अब महज औपचारिकता माना जा रहा है क्योंकि दोनों पक्ष मसौदे का अपना-अपना संस्करण तैयार करने और लोकपाल के मुद्दे पर राजनीतिक दलों से संवाद करने का मन बना चुके हैं।
आपका मत
क्या आप मानते हैं कि अब अन्ना हजारे को सरकार से आर पार की लड़ाई छेड़ देना चाहिए? क्या सरकार लोकपाल बिल लाने के मुद्दे पर कतई गंभीर नहीं है? इन सभी मुद्दों पर आप भी दे सकते हैं अपना मत। लेकिन किसी भी आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए पाठक स्वयं जिम्मेदार होंगे।

