नई दिल्ली : लोकपाल विधेयक पर कांग्रेस ने बुलाई सर्वदलीय बैठक


नई दिल्ली, आँखों देखी न्यूज़ : कांग्रेस पार्टी ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर लोकपाल विधेयक पर बने गतिरोध को जहां तोड़ने की कोशिश की है। वहीं, यूपीए के घटक दलों में इस अहम मुद्दे पर मतभेद है।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने जहां कहा कि सरकार 'प्रथम दृष्टया' प्रधानमंत्री पद को लोकपाल के दायरे में लाने का विरोध करती है, वहीं संप्रग की घटक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने सरकार के विचार का समर्थन किया तो द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने कहा कि वह प्रस्ताव के खिलाफ नहीं है।

'सीएनएन-आईबीएन' के कार्यक्रम 'डेविल एडवोकेट' में सिब्बल ने कहा कि "सरकार के भीतर हम प्रथम दृष्टया यह महसूस करते हैं कि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में नहीं लाना चाहिए। इसके साथ ही हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री द्वारा कार्यालय छोड़ देने पर उन्हें अभियोजन से मुक्त नहीं होना चाहिए।


मालूम हो कि कांग्रेस कोर समिति ने शनिवार को सुझाव दिया कि लोकपाल विधेयक पर विचार जानने के लिए सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाए। सूत्रों ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली बैठक में यह महसूस किया गया कि इस तरह की बैठक से विवादित मुद्दों पर सहमति बनाने में मदद मिलेगी और पार्टी एवं सरकार पर दबाव कम होगा।

कांग्रेस कोर समिति की दो दिनों में यह दूसरी बैठक है। बैठक में सोनिया और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम शामिल हुए। दोनों पक्षों में विवाद की प्रमुख वजह प्रधानमंत्री को विधेयक के दायरे में लाने को लेकर है। सामाजिक संगठन प्रधानमंत्री को विधेयक के दायरे में लाने की मांग कर रहे हैं जबकि सरकार इसके विरोध में है।

गौरतलब है कि मनमोहन सिंह ने पूर्व में कहा था कि उनके पद को लोकपाल के दायरे में लाने के विचार पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। सिब्बल ने कहा कि यह व्यक्तिगत रूप से मनमोहन सिंह से जुड़ा सवाल नहीं, बल्कि एक संस्था का मामला है। सिब्बल ने कहा कि सरकार प्रस्तावित लोकपाल विधेयक को लेकर गांधीवादी अन्ना हजारे से मतभेद समाप्त करना चाहती है। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल को विधेयक का एक ही मसौदा सौंपा जाएगा।

उधर प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने पर यूपीए सहयोगियों में मतभेद सामने आ गया है।राकांपा के प्रवक्ता डी.पी. त्रिपाठी ने कहा कि उनकी पार्टी नहीं चाहती कि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाया जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय की गरिमा बनाए रखनी होगी। वह देश के खुफिया एवं विदेशी मामलों से जुड़े कई गोपनीय मामलों को देखते हैं।

डीएमके प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन ने कहा कि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि हम इसके खिलाफ नहीं हैं

Posted by गजेन्द्र सिंह at 5:44 pm.

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