लखनऊ : किसानो ने मांगी मायावती से गारंटी
7:51 pm
लखनऊ, आँखों देखी संवाददाता : भूमि अधिग्रहण को लेकर मचे सियासी बवाल को शांत करने के लिए मुख्यमंत्री मायावती ने गुरुवार को भले ही घोषणाओं का पिटारा खोल दिया परन्तु कई किसान नेताओं में दिलों में टीस अभी भी बाकी है। फैसलों पर अमल की गारंटी चाहने वाले किसानों को अधिग्रहण के पुराने मामलों पर चुप्पी साधे रहने से भी एतराज है।
भारतीय किसान यूनियन प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण नीति से किसानों का भला होगा। आंदोलनों के दौरान किसानों पर लगे मुकदमें वापस लेने और गांवों में बिजली आपूर्ति दुरुस्त करने जैसे निर्णय भी सराहनीय है। लेकिन असली मसला फैसलों पर ईमानदारी से अमल होने का है। उनका कहना है कि अभी सरकार से कई अन्य बिंदुओं पर भी वार्ता होनी बाकी है।
उधर टप्पल आंदोलन से चर्चित हुए किसान नेता रामबाबू कटेलिया भी कमोवेश यही राय रखते है। उनका कहना है कि किसानों को उनकी भूमि का ही नहीं उपज का भी लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए। अधिग्रहण के पुराने मामलों पर सरकार को नरम रूख अपनाना चाहिए। सर्वदलीय किसान संघर्ष समिति के वरिष्ठ कार्यकर्ता देवदत्ता सिंह का कहना है कि किसानों के पास खोने को अधिक नहीं था। मुख्यमंत्री की घोषणाओं से राहत जरूर मिलेगी परन्तु देखना यह है कि उन्हें लागू करने में कितनी ईमानदारी बरती जायेगी? कही फैसले चुनावी हथकंडा साबित न हो जाए।
नोएडा किसान संघर्ष समिति के अजित दौला ने आरोप लगाया कि मुआवजे के पुराने विवादों में सरकार के ताजा फैसलों से कोई लाभ नहीं होगा। मेरठ से आए किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष विजयपाल तोमर ने भी सरकार की नीति और नीयत पर सवाल उठाए।

