नई दिल्ली : रामदेव से अब कोई बात नहीं करेगी सरकार

नई दिल्ली,आँखों देखी संवाददाता : बाबा रामदेव के अनशन के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई के कुछ घंटों बाद सरकार ने विदेशों में जमा कालाधन के मुद्दे पर रामदेव के साथ आगे बातचीत से इंकार कर दिया। योग गुरू के साथ बातचीत की प्रक्रिया में शामिल रहे केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने कहा कि अब रामदेव से बात करने के लिए कुछ बचा नहीं है। हम किस मुद्दे पर बातचीत करेंगे। जो कुछ भी बातचीत होनी थी वह हो चुकी है।'

एक अन्य केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने यह स्पष्ट किया कि पुलिस कार्रवाई को सरकार और पार्टी का समर्थन था। इस सवाल पर कि क्या इस कार्रवाई को पार्टी की पुष्टि थी, उन्होंने कहा, निश्चित रूप से सौ फीसदी। इस तरह की कोई कार्रवाई सरकार और पार्टी में सौ फीसदी एकता के नहीं होती।

कालाधन के सवाल पर सहाय ने कहा कि विदेशों में जमा कालेधन को वापस लाना सरकार के एजेंडे में है और वह इस मुद्दे को लेकर सिर्फ इसलिए नहीं प्रतिबद्ध है कि इसे किसी व्यक्ति ने उठाया है।

भाजपा द्वारा बाबा रामदेव और उनके समर्थकों के खिलाफ रामलीला मैदान में की गई कार्रवाई की आपातकाल से तुलना किए जाने को खारिज करते हुए संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि योग गुरू के पास आंदोलन जारी रखने के लिए कोई वाजिब कारण नहीं था इसलिए सरकार को कार्रवाई करनी पड़ी।

बंसल ने कहा कि उनके [बाबा रामदेव] पास आंदोलन जारी रखने का कोई वाजिब कारण नहीं था इसलिए सरकार को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी।

उन्होंने कहा कि रामदेव ने रामलीला मैदान के इस्तेमाल की खतिर ली गई अनुमति और वहां लोगों के जमा होने की संख्या की अनुमति का उल्लंघन किया है।

उन्होंने कहा कि वह योग का मंच नहीं बल्कि राजनीतिक मंच बन गया था।

रामदेव के साथ बातचीत में शामिल अन्य केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने बाबा रामदेव के अनशन को खत्म करने की पुलिस कार्रवाई को जायज ठहराते हुए कहा कि योगगुरु ने रामलीला मैदान में आयोजन करने की अनुमति लिए जाने के दौरान किया वादा तोड़ा और यहां तक कि वह अपने आश्वासनों से भी पलट गए।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में कानून व्यवस्था से जुड़ी स्थिति बिगड़ने की आशंका थी। रामदेव ने अपने 'राजनीतिक आसनों' के लिए 50,000 लोगों की भीड़ जुटा ली थी, जबकि उन्होंने रामलीला मैदान पर योग शिविर लगाने के लिए सिर्फ पांच हजार लोगों को इकट्ठा करने की बात कही थी।

उन्होंने कहा, 'वह मंच योग कराने वाला नहीं था, बल्कि वह राजनीतिक मंच बन गया था। दिल्ली में कानून व्यवस्था कायम रखना जरूरी थी। हम इसमें कोई अवरोध नहीं चाहते थे।'

सिब्बल ने भी भाजपा के इन आरोपों का खंडन किया कि यह कड़ी कार्रवाई आपातकाल के दिनों की याद दिलाती है।

सिब्बल ने रामदेव के अनशन के दौरान साध्वी ऋतंभरा की मौजूदगी के जाहिरा संदर्भ में कहा कि अब इसमें कोई शक नहीं रह गया है। ..वह [रामदेव] संघ का दूसरा चेहरा हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रामदेव पर भरोसा नहीं रह गया था क्योंकि उन्होंने सरकार और अपने समर्थकों के साथ 'दगाबाजी' की थी। सिब्बल ने कहा, 'रामदेव और सरकार के बीच समझौता हो गया था लेकिन योगगुरु ने यह बात अपने समर्थकों को नहीं बताई।'

उन्होंने कहा कि सरकार और रामदेव के बीच समझौता हो गया था, जिसके तहत योगगुरु को कल दोपहर ही अनशन वापस लेने की घोषणा करनी थी लेकिन उन्होंने वादा नहीं निभाया।

सिब्बल ने रामदेव के एक करीबी सहयोगी के लिखे पत्र को सार्वजनिक किए जाने के बारे में कहा, 'आश्वासनों के बावजूद रामदेव ने अनशन वापस लेने की घोषणा नहीं की। हम उनसे फोन पर संपर्क में थे। हमने कल अपराह्न पांच बजे तक इंतजार किया। जब उन्होंने वक्तव्य नहीं दिया तो हमने मीडिया के सामने सारी बातें बताने का फैसला किया। हमने यह बात रामदेव को भी बता दी थी।' उन्होंने कहा, 'जब वह अपनी कही बात से पीछे हट गए तो हम उन पर कैसे विश्वास करते।'

Posted by गजेन्द्र सिंह at 6:52 pm.

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