आसमान के नीचे पड़े अनाज को उठाने के लिए सरकार नहीं उठा रही पर्याप्त कदम

आंखो देखी संवाददाता : पंजाब और हरियाणा में खुले आसमान के नीचे पड़े अनाज के भारी भंडार को उठाने के लिए सरकार पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है.

दोनों राज्य देश के कुल अन्न उत्पादन में 70 प्रतिशत का योगदान करते हैं.पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात के दौरान राज्य में भण्डारण सुविधाओं के अभाव का मुद्दा उठाया था.

अब पड़ोसी राज्य हरियाणा ने भी केंद्र सरकार से खुले में पड़े अनाज को सुरक्षित करने के लिए कहा है.

हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री महेंद्र प्रताप सिंह ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह खुले आसमान के नीचे पड़े अनाजों को सुरक्षित करने का तत्काल बंदोबस्त करे, क्योंकि यदि ऐसा नहीं हुआ तो ये अनाज सड़ जाएंगे.

सिंह ने कहा, "फिलहाल हरियाणा के पास 45.82 लाख टन अनाज भण्डारण की क्षमता है, जबकि यहां 88.72 लाख टन गेहूं का भण्डार पड़ा हुआ है.

इसमें से 0.85 लाख टन गेहूं 2008-09 में खरीदा गया था, 5.36 लाख टन गेहूं 2009-10 के दौरान खरीदा गया था और 19.64 लाख टन गेहूं 2010-11 के दौरान खरीदा गया था."

सिंह ने कहा, "इसके अलावा, 13.75 लाख टन चावल और एक लाख टन बाजरा भी राज्य सरकार के गोदामों में पड़ा हुआ है."

किसानों से अनाज की खरीदारी ज्यादातर सरकारी एजेंसियों द्वारा की गई है, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा कोष मुहैया कराया जाता है.

सिंह ने अनाजों को तत्काल उठाने की मांग करते हुए कहा है कि 70 प्रतिशत अनाज राज्य में खुले आसमान के नीचे रखे हुए हैं. उन्होंने कहा, "यदि अक्टूबर 2011 तक धान के भण्डार की निकासी नहीं की गई तो आगामी मौसम में उसकी दराई सम्भव नहीं हो पाएगी.

औसतन हरियाणा में प्रति महीने 10 लाख टन गेहूं और तीन लाख टन चावल की निकासी की आवश्यकता है."

इस स्थिति से किसान नाराज हैं. पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के किसान शमशेर सिंह ने कहा, "ऐसे देश में जहां लाखों की संख्या में लोग भूखे हों, वहां बड़ी मात्रा में अनाज, गेहूं, धान सड़ने के लिए दोनों राज्यों में खुले आसमान के नीचे पड़े हुए हैं.

केंद्र सरकार उचित भण्डारण सुविधा मुहैया कराने में इन राज्यों को सहयोग नहीं कर रही है. इतनी बड़ी मात्रा में अनाजों को सड़ने के लिए छोड़ देना, सरकारी अपराध है."

ज्ञात हो कि पंजाब और हरियाणा, राष्ट्रीय खाद्य खजाने में कुल 70 प्रतिशत का योगदान करते हैं. खासतौर से गेहूं और चावल का. जबकि दोनों का भौगोलिक क्षेत्र देश के क्षेत्रफल का मात्र दो प्रतिशत है.

पंजाब सरकार ने भी राज्य में पर्याप्त भण्डारण सुविधा मुहैया कराने में केंद्र सरकार की नाकामी की निंदा की है. मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री से कहा था कि राज्य में 49 लाख टन अनाज रखने के लिए भण्डारण सुविधा की जरूरत है, जबकि यहां 22 लाख टन अनाज भण्डारण की ही प्रामाणित क्षमता सुलभ है.

बादल ने प्रधानमंत्री से यह भी अनुरोध किया था कि वह रेल मंत्रालय को निर्देश दें कि राज्य से अनाजों को निकालने में तेजी लाया जाए ताकि धान की नई फसल के लिए अधिक भण्डारण सुविधा उपलब्ध हो सके. बादल ने कहा कि राज्य में फिलहाल कुल 201 लाख टन अन्न भण्डार मौजूद है.

Posted by रवि चौहान at 7:20 pm.

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