पुलिस को चाहिए करोड़ों के हीरे
10:39 am
13 जुलाई को ब्लास्ट के साथ करोड़ों के हीरे भी हवा में उड़ गए। अब यही उड़े हुए हीरे व्यापारियों और पुलिस के बीच मनमुटाव का कारण बन गए हैं। दरअसल, ब्लास्ट के बाद व्यापारियों ने अपनी ओर से आसपास के बिखरे हुए हीरे बटोरे, उन्हें छलनी से छाना फिर उसे मुंबई डायमंड मर्चेंट असोसिएशन (एमडीएमए) के ऑफिस में जमा कर दिया। चूंकि फॉरेंसिक जांच के लिए वारदात स्थल अब भी मुंबई पुलिस के कब्जे में है, सो पुलिस ने तमाम हीरे डी.बी. मार्ग पुलिस स्टेशन में जमा करने को कहा है। पुलिस का फरमान कई व्यापारियों के गले नहीं उतर रहा है और इसके बारे में कोई फैसला लेने के लिए शनिवार को व्यापारियों ने मीटिंग बुलाई है। सूत्रों के अनुसार, 30 घंटों की छानबीन में करीब 25 से 30 हीरे मिले हैं और मार्केट में इनकी कीमत 7-10 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
एमडीएमए के सेक्रेटरी भरत वी. शाह ने बताया कि पुलिस ने हमारे घर फोन कर हमसे छानबीन में पाए गए हीरे पुलिस स्टेशन में जमा करने को कहा है, जिसके बारे में हम शनिवार को अपने सदस्यों के साथ चर्चा करेंगे। इस सवाल पर कि क्या कोई इन हीरों को क्लेम करने आएगा, श्री शाह ने बताया कि अगर कोई नहीं आता है तो हम इसे चैरिटी (कोष) में जमा कर देंगे।
गौरतलब है कि ओपरा हाउस के डायमंड मर्चेंट अपना 98 फीसदी कारोबार बिना 'जांगड़' के करते हैं, क्योंकि ऐसा करने से उन्हें कई तरह के टैक्स और ड्यूटी नहीं चुकानी पड़ती है। यही नहीं, ओपरा हाउस ही ऐसा बिजनेस सेंटर है जहां करोड़ों की डील सड़क पर चलते फिरते कर ली जाती है और इसका कोई हिसाब नहीं होता। जानकार कहते हैं कि इन हीरों को क्लेम करने कोई नहीं आएगा।
उधर, पुलिस जांच पड़ताल से ब्लास्ट प्रभावित एरिया तीसरे दिन भी पुलिस की कस्टडी में रहा जिससे आसपास के लोगों को खासी परेशानी हुई। इस मद्देनजर 'हीरा जवेरात' ग्रुप के एमडी राजेश बजाज ने कहा कि अब समय आ गया है कि राज्य और केंद्र सरकार साउथ मुंबई के क्षेत्र को आतंकवाद प्रभावित क्षेत्र घोषित करे और ऐसी दहशत का कोई पर्मानेंट इलाज ढूंढे।

