वीडियो गेम खेलने से बढ़ता है मोटापा
विशेष 11:01 am
उद्योग मंडल एसोचैम की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वीडियो गेम के प्रति बच्चों की दीवानगी दिनों-दिन बढ़ती जा रही है. 82 प्रतिशत से अधिक किशोर हर हफ्ते औसतन 14 से 16 घंटे कंप्यूटर, वेब पोर्टल आदि पर गेम खेलने पर खर्च करते हैं. करीब सात प्रतिशत बच्चों में एक तरह से गेम की बीमारी सी हो गई है. वे हर हफ्ते करीब 20 घंटे गेम खेलने पर खर्च करते हैं.
गेम खेलने की वजह से बच्चो में तमाम तरह की समस्याएं देखने को मिल रही है. इसकी वजह से बच्चे पढ़ाई-लिखाई के लिए कम समय निकाल पा रहे हैं और घर के सदस्यों से दूर होते जा रहे हैं. साथ ही स्कूल का होमवर्क करने में उनका मन नहीं लग रहा है. अगर बात बीमारियों की करें तो उनमें मोटापा, आक्रामक सोच और असामान्य व्यवहार बढ़ रहा है.
एसोचैम ने सामाजिक विकास फाउंडेशन के जरिए दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, मुंबई, चंडीगढ़, लखनऊ, पटना समेत कई महानरों के 2,000 से अधिक बच्चों और 1,000 से अधिक अभिभावकों के बीच यह अध्ययन कराया है.
सर्वे अप्रैल से जून के बीच कराया गया है जिसमें 8 से 18 साल तक की उम्र के बच्चों-किशोरों को शामिल किया गया. इस अध्ययन में शामिल करीब 84 प्रतिशत बच्चों ने माना कि वे घर में अकेले होने पर मार-धाड़ वाले गेम खेलते हैं. कम से कम 76 प्रतिशत बच्चों को एक्शन गेम खेलने में मजा आता है, जबकि कम से कम 45 प्रतिशत बच्चे चाहते हैं कि उनके बेडरूम में वीडियो गेम होना चाहिए.
सर्वे में शामिल कुल बच्चों में से 1200 (76 प्रतिशत) ने माना कि उन्होंने वीडियो गेम खेला है. इसमें से 20 प्रतिशत लड़कियों और किशोरियों ने कहा कि रोज वे 30 मिनट और सप्ताहांत पर एक घंटे गेम खेलते हैं. वहीं लड़कों ने माना कि वे रोजाना 50 मिनट और सप्तहांत में दो से तीन घंटे गेम खेलते हैं.

