उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने का फैसला लिया मायावती सरकार ने

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने छोटे राज्यों की हिमायत की है. राज्य को चार हिस्सों में बांटने का फैसला लखनऊ में हुई एक कैबिनेट बैठक में लिया गया.

मायावती मंगलवार 15 नवंबर को लखनऊ में आयोजित एक प्रेस वार्ता में बोल रही थीं.

मायावती ने उत्तर प्रदेश को चार भागों में बांटने की वकालत की और कहा कि इस बात का प्रस्ताव विधानसभा सत्र में रखा जाएगा और भारत सरकार को भेजा जाएगा. उत्तर प्रदेश विधानसभा का सत्र 21 नवंबर से शुरू हो रहा है.

यूपी को जिन चार हिस्सों में बांटे जाने का प्रस्ताव है वो हैं-- अवध प्रदेश, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिम उत्तर प्रदेश.

मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश कोचार हिस्सों में बांटने को लेकर केंद्र पर दबाव बनाया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में सबसे ज़्यादा आबादी है और छोटे राज्य बनाने से प्रशासन बेहतर होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की पिछली सरकारों ने ग़लत नीतियां अपनाई जिनके कारण यूपी पिछड़ गया. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य को अभी तक केंद्र से आर्थिक पैकेज नहीं मिला है.

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की मांग होती रही है. बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की मांग पुरानी है. पिछले दिनों जब पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की मांग उठी तो राज्य सरकार ने प्रदेश के चार हिस्से करने का समर्थन कर दिया.

आसान नहीं है बंटवारे की डगर
मायावती को पार्टी के सभी विधायकों का समर्थन मिलने की उम्मीद नहीं है क्योंकि पिछले दिनों टिकटों के बंटवारे से असंतुष्ट बसपा के कई विधायक गच्चा दे सकते हैं. करीब 45 बसपा विधायक ऐसे हैं, जिनके टिकट काटे गए हैं.

403 विधायकों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में 6 स्थान खाली हैं. 397 में से बसपा के कुल 227 विधायक हैं. अगर ये विधायक विभाजन के प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान सदन में नहीं आए तो ये प्रस्ताव गिर जाएगा.

उत्तर प्रदेश के बंटवारे का प्रस्ताव विधानसभा में पास कराना मायावती के लिए आसान नहीं होगा क्योंकि मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी इस प्रस्ताव का सबसे ज्यादा विरोध कर रही है. बाकी दल भी मायावती का साथ देंगे इसकी उम्मीद कम है. सदन में सपा 88, फाजपा के 48, कांग्रेस के 20 और आरएलडी के 10 विधायक हैं. 9 विधायक निर्दलीय हैं.

अगर बसपा के विद्रोही एक हो गए और विपक्षी सदस्य विरोध पर कायम रहे तो मायावती को मुश्किल हो सकती है.

वैसे मायावती सरकार की मुश्किलें बढ़ी है. लेखानुदान पारित कराने में भी 199 सदस्यों का सदन में रहने का आंकड़ा सरकार को संकट में डाल सकता है.

Posted by गजेन्द्र सिंह at 6:00 pm.

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