टीइटी परीक्षा से शहर में बना अव्यवस्था और अफरा तफरी का माहौल

मेरठ : यूपी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीइटी) रविवार को अव्यवस्था और अफरा तफरी के बीच हुई। आनन फानन में अधिकारियों ने परीक्षा तो करा ली, लेकिन किसी के पेपर छूटे तो कोई पेपर ही पूरा नहीं कर पाया। भटकते रहे परीक्षार्थी टीइटी परीक्षा 76 सेंटरों पर हुई।

(<<= तैयारी में व्यस्त परीक्षार्थी)

कई लोगों के एडमिट कार्ड पर स्कूल का नाम तो था पर सही पता नहीं लिखा गया था। इससे सैकड़ों परीक्षार्थी स्कूल, कालेज जहां केंद्र था, पता तलाशने को घंटों परेशान रहे।

सही पता मिलने की वजह से परीक्षार्थी देर से परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे। इससे वे परीक्षा देने से रह गए। इंस्टीट्यूट आफ होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नालोजी माल रोड का सेंटर एक दिन पहले बदल कर आरवीसी स्कूल कर दिया गया। ओएमआर सीट को लेकर हंगामा सेंट मेरीज में सुबह की पाली में परीक्षा के दौरान प्रश्न पुस्तिका और उत्तर पुस्तिका पर अलग-अलग ओएमआर नंबर होने की वजह से अभिलाषा और आभा गुप्ता के परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया।

उनका कहना था कि उन्हें दूसरे पाली की बुकलेट दे दी गई। ऐसे में परीक्षा रद्द हो सकती है। एक कक्षा में एक छात्र ने घड़ी से नकल करने की शिकायत की। हंगामे को देखते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक, एसडीएम मौके पर पहुंचे। उन्होंने आश्वस्त किया कि परीक्षा सही हुई है। कई सेंटरों पर हंगामा एसडी सदर, डीएन इंटर कालेज, केके इंटर कालेज, एसडी कंकरखेड़ा आदि कई सेंटरों पर भारी भीड़ के चलते कई लोग परीक्षा नहीं दे पाए। एसडी सदर में जाम की वजह से बहुत से परीक्षार्थी देर से पहुंचे।

उनमें से अधिकतर परीक्षा से वंचित रह गए। दूसरी पाली की परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र लेकर आए वाहन को भी परीक्षार्थियों ने अंदर नहीं जाने दिया। केके इंटर कालेज में देर से पहुंचे परीक्षार्थियों को जेडी के निर्देश पर 30 मिनट के बाद प्रवेश मिल पाया। जल्दी ले ली कापी सुबह की पाली की परीक्षा साढ़े दस बजे से बारह बजे तक रही। लेकिन कई सेंटरों पर परीक्षार्थी आधे घंटे बाद पहुंचे।

कुछ सेंटरों ने उन्हें परीक्षा देने की अनुमति दे दी, लेकिन उन्हें अतिरिक्त समय नहीं मिल पाया। इससे उनके बहुत सारे प्रश्न छूट गए। इससे परीक्षार्थियों में आक्रोश रहा। शिक्षा विभाग फेल शिक्षक पात्रता परीक्षा में शिक्षा विभाग की व्यवस्था पूरी तरह से फेल साबित हुई। शिक्षा विभाग में सुबह 10.30 बजे तक ये एडमिट कॉर्ड बांटते रहे। परीक्षा केंद्रों का जो नाम एडमिट कॉर्ड पर अंकित किया गया था, उसके गलत और अपूर्ण होने की वजह से छात्र एक से दूसरे शिक्षण संस्थानों का चक्कर काटते रहे।

इस्माईल कॉलेज का पूरा ब्योरा नहीं होना, शहीद मंगल पांडेय राजकीय महाविद्यालय का अपूर्ण पता होने की वजह से छात्र काफी परेशान हुए। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से परीक्षा के दिन तक एडमिट कार्ड बनते रहे। साढ़े दस बजे शहीद मंगलपांडे राजकीय कालेज में जिस महिला को परीक्षा देना था। वह दस बजकर बीस मिनट पर डीआइओएस कार्यालय में एडमिट कार्ड बनवाती रही। एडमिट कार्ड मिलने के बाद उसकी आंखों से आंसू छलक आए।

Posted by गजेन्द्र सिंह at 1:16 am.

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