मनरेगा में भ्रष्टाचार के आरोप भ्रामक एवं निराधार : मायावती

मुख्यमंत्री मायावती ने मंत्री जयराम रमेश के मनरेगा में भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज करते हुए उसे भ्रामक एवं निराधार बताया है.

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने राज्य में मनरेगा के क्रियान्वयन में कथित खामियों के बारे में राज्य सरकार को मिले केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के पत्र पर पलटवार करते हुए कहा है कि मनरेगा के क्रियान्वयन में आधारहीन एवं भ्रामक सूचनाओं के माध्यम से भ्रम फैलाने से अच्छा होगा कि रमेश इस योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने का प्रयास करें.

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने 15 नवम्बर को लिखे पत्र में प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में व्याप्त भ्रष्टाचार का हवाला देते हुए कहा था कि मायावती सरकार भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण दे रही है.

मुख्यमंत्री की तरफ से जवाब देते हुए कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में बताया, मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार को मनरेगा में जहां भी भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं, उस पर कठोर कार्रवाई की गई है.

शेखर ने बताया कि केन्द्रीय मंत्री रमेश का पत्र राज्य सरकार को 17 नवंबर को प्राप्त हुआ था और उसे उसी दिन मीडिया को भी जारी कर दिया गया था.

मंत्रिमंडलीय सचिव ने बताया, मुख्यमंत्री यह जानना चाहती हैं कि उत्तर प्रदेश की तरह क्या अन्य राज्यों को भी नियमित रूप से ऐसे ही पत्र लिखे जा रहे हैं, या फिर केवल उत्तर प्रदेश में ही इस तरह का भ्रामक वातावरण बनाने की कोशिश की जा रही है.

यह बताते हुए कि उत्तर प्रदेश मनरेगा के क्रियान्वयन में सर्वश्रेष्ठ प्रदेश रहा है. शेखर ने कहा, ‘मुख्यमंत्री का सवाल यह है कि अचानक राज्य में इतनी खामियां कैसे दिखने लगी.’

उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत व्यय होने वाली धनराशि का तीन चौथाई हिस्सा सीधे पंचायतों के जरिए खर्च होता है और इसमें राज्य सरकार के स्तर पर गड़बड़ी की संभावना बहुत कम होती है.

शेखर ने कहा, हमें अब तक मनरेगा के क्रियान्वयन के बारे में केंद्रीय पर्यवेक्षक (सेन्ट्रल मानिटर) की ओर से 21 रिपोर्ट प्राप्त हुई हैं. जिनमें से 17 के बारे में कृत कार्यवाही से केंद्र को अवगत करा दिया गया है और चार का जवाब दिया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि मनरेगा के क्रियान्वयन में प्रदेश में जहां भी शिकायतें मिल रही हैं समुचित कार्यवाही की जा रही है और इस संबंध में अब तक 117 प्राथमिकियां दर्ज करके कार्यवाही हो रही है. जिनमें 56 मामलों में संबंधित अदालतों में आरोप पत्र दाखिल किये जा चुके हैं और 55 में जांच जारी है, छह मामले गलत पाए गए.

यह बताते हुए कि मनरेगा के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं के आरोप में 17 प्रथम श्रेणी के अधिकारियों सहित 200 से अधिक लोगों के खिलाफ कार्यवाही की जा चुकी है.

उन्होंने कहा कि जिस सोनभद्र जिले के बारे में केंद्रीय मंत्री के पत्र में विशेष उल्लेख किया गया है वहां भी 10 प्राथमिकी दर्ज करके मामले की छानबीन हो रही है.उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री के पत्र के जवाब में राज्य सरकार की ओर से एक विस्तृत पत्र भेजा जा रहा है.

उन्होंने कहा, मनरेगा में भ्रष्टाचार के 117 मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई और 56 मामलों में आरोप पत्र दाखिल किए गए हैं. इसके अलावा चार सरपंचों सहित 12 लोगों को जेल भेजा गया है.

उन्होंने कहा कि मनरेगा का क्रियान्वयन पंचायत स्तर पर होता है और इसमें राज्य सरकार के अधिकारियों की भूमिका नहीं होती. इसलिए रमेश के आरोप बेबुनियाद और भ्रामक हैं.

मायावती ने प्रश्न किया, केंद्र सरकार को उत्तर प्रदेश के मनरेगा में भ्रष्टाचार क्यों दिखता है, क्या दूसरे राज्यों के मनरेगा में भ्रष्टाचार नहीं है?.

पूर्वी उत्तर प्रदेश के बुनकरों के लिए केंद्र सरकार की ओर से विशेष पैकेज घोषित किए जाने के ऐलान के मामले का उल्लेख करते हुए मंत्रिमंडलीय सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री जानना चाहती हैं कि बुनकरों के लिए केंद्र सरकार का प्रस्तावित पैकेज कहीं चुनावी स्टंट तो नहीं है क्योंकि राज्य सरकार के इसी संबंध में किए गए आग्रह का केंद्र सरकार ने अब तक कोई सकारात्मक संज्ञान नहीं लिया है.

उन्होंने कहा वर्ष 2007 में सरकार में आने के बाद मुख्यमंत्री मायावती ने पूर्वांचल के विकास के लिए केंद्र सरकार से 36 हजार करोड़ रुपए के विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की थी. जिसमें बुनकरों के लिए कल्याणकारी योजनाएं भी शामिल थीं, मगर केंद्र सरकार की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला.यह बताते हुए कि बुनकरों के कल्याण के लिए प्रदेश के मुख्य सचिव की ओर से भी केंद्र सरकार को पत्र लिखे गए, पर परिणाम शून्य रहा.

कैबिनेट सचिव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अपने सीमित संसाधनों से बुनकरों के लिए विभिन्न योजनाएं शुरू की हैं और मुख्यमंत्री जानना चाहती हैं कि आखिर केंद्र सरकार को बुनकरों की याद साढ़े चार साल के बाद क्यों आईं.

Posted by रवि चौहान at 5:41 pm.

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