खाद्य मुद्रास्फीति घटकर 4.35 प्रतिशत, चार साल के निचले स्तर पर
ताजा खबरें, व्यापार 7:57 am
खाद्य मुद्रास्फीति तीन दिसंबर को समाप्त सप्ताह में घटकर 4.35 प्रतिशत रह गई है. इससे पहले 23 फरवरी 2008 को खाद्य मुद्रास्फीति 4.28 प्रतिशत रही थी.
थोक मूल्य सूचकांक आधारित खाद्य मुद्रास्फीति पूर्व सप्ताह में 6.6 प्रतिशत जबकि एक साल पहले 10.78 प्रतिशत थी.
विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य उत्पादों की कीमतों में वृद्धि दर पांच प्रतिशत के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आना सरकार के लिए राहत का संकेत है.
सरकार बीते दो साल से ऊंची मुद्रास्फीति से दो चार हो रही है.
जारी आंकड़ों के अनुसार आलोच्य सप्ताह में प्याज के दाम 46.03 प्रतिशत, आलू के दाम 33.28 प्रतिशत तथा गेहूं के दाम 4.43 प्रतिशत टूटे.
सब्जियों के दाम कुल मिलाकर 12.28 प्रतिशत घटे.
वहीं सालाना आधार पर अन्य खाद्य उत्पादों के दाम में तेजी देखने को मिली.
आलोच्य सप्ताह में दालों में 11.76 प्रतिशत, दूध 11.08 प्रतिशत तथा अंडे, मीट व मछली 9.26 प्रतिशत महंगी हुईं.
फल भी आलोच्य सप्ताह में सालाना आधार पर 9.37 प्रतिशत महंगे हो गए.
प्राथमिक उत्पाद खंड की मुद्रास्फीति तीन दिसंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान 5.48 फीसद रही जबकि पिछले सप्ताह यह 6.92 फीसद थी.
प्राथमिक उत्पाद खंड का थोकमूल्य सूचकांक में 20 फीसद योगदान है. गैर खाद्य खंड की मंहगाई दर समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान 2.12 फीसद थी जो 26 नवंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान 1.37 फीसद थी.
नवंबर की शुरूआत तक दोहरे अंक में बरकरार खाद्य उत्पादों की मुद्रास्फीति में कमी से सरकार और रिजर्व बैंक दोनों को राहत मिलेगी.
बुधवार को मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने उम्मीद जताई कि खाद्य मुद्रास्फीति महीने भर में तीन फीसद के नीचे चली आएगी.
खाद्य मुद्रास्फीति में कमी सरकार के लिए उम्मीद की किरण बन कर आई है जबकि अर्थव्यवस्था नरमी के दौर से गुजर रही है.
सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर दूसरी तिमाही में घटकर 6.9 फीसद पर आ गई जो पिछले दो साल की निम्नतम दर है.
अक्तूबर में औद्योगिक उत्पाद में भी 5.1 फीसद की कमी आई.
सकल मुद्रास्फीति पिछले दिसंबर 2010 से नौ फीसद से ऊपर के स्तर पर बरकरार हैं. इस साल नवंबर में यह 9.11 फीसद पर थी. सकल मुद्रास्फीति में विनिर्मित उत्पाद भी शामिल हैं.
रिजर्व बैंक ने मांग पर नियंत्रण और मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए मार्च 2010 से 13 बार नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है.
मौद्रिक नीति की दूसरी तिमाही समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने कहा था कि उसे मांग और आपूर्ति में अंतर के कारण दिसंबर तक मंहगाई दर उच्च स्तर पर बने रहने की उम्मीद है जिसके बाद मार्च तक यह घटकर सात फीसद पर आएगी.

