स्टेम सेल तकनीक बनी गंजेपन से परेशान लोगों के लिए वरदान

गंजेपन से परेशान लोगों के लिए स्टेम सेल तकनीक वरदान बन कर सामने आई है.

यह तकनीक भारत में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है.सुप्रसिद्ध कॉस्मेटोलॉजिस्ट डॉ. सीमा गोयल के अनुसार स्टेम सेल गंजेपन और साथ ही साथ बालों के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

हाल के एक वैज्ञानिक अध्ययन से पता चला है कि गंजेपन के लिए स्टेम सेल की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है. उन्होंने बताया कि शोध से पता चला है कि जब स्टेम सेल निष्क्रिय हो जाते हैं तब गंजापन शुरू हो जाता है. ऐसे में स्टेम सेल को दोबारा सक्रिय बनाकर गंजेपन को दूर करना संभव है.

यहां स्थित बरकोविट्स क्लिनिक की निदेशक डॉ. सीमा गोयल बताती हैं कि इस तकनीक के तहत खोपडी हेयर शाफ्ट में स्टेम कोशिकाएं प्रविष्ट करा दी जाती हैं जो रोम कूपों हेयर फॉलिकल्स को पोषित करती हैं. इसके कारण नई रोम कूप निर्मित होती हैं और नए बाल उगने लगते हैं.

जिससे सिर के गंजे भाग में भी बाल लहराने लगते हैं. बालों के प्रत्यारोपण की परम्परागत सर्जरी में इसमें सिर के उन हिस्सों, जहां बाल अब भी सामान्य रूप से उग रहे होते है, से केश-ग्रंथियां लेकर उन्हें गंजेपन से प्रभावित हिस्सों में ट्रांसप्लांट किया जाता है जबकि स्टेम सेल तकनीक में गंजे भाग पर नए रोम कूप बनने लगते हैं.

त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ते तनाव और प्रदूषण के कारण आज कम उम्र के लोग भी गंजेपन का शिकार हो रहे हैं.अध्ययनों के मुताबिक 30 वर्ष की उम् में आते-आते करीब 25 फीसदी और 60 वर्ष की उम्र में आने पर करीब दो-तिहाई पुरूष गंजेपन की समस्या से पीड़ित हो जाते हैं.

एक समय गंजापन केवल पुरूषों का सरदर्द था लेकिन आधुनिक समय में बड़ा संख्या में महिलाएं भी इस समस्या से ग्रस्त होने लगी हैं. जब से महिलाएं समाज में पुरूषों की तरह की भूमिका निभाने लगी हैं और पुरूषों की तरह जिम्मेदारियां उठाने लगी हैं तब से वे भी पुरूषों की तरह बाल गिरने तथा गंजेपन की शिकार होने लगी हैं.

डॉ. सीमा गोयल के अनुसार बालों के गिरने के कई कारण हैं. कुछ लोगों में बालों का गिरना आनुवांशिक कारणों से होता है.

कुछ लोगों के बाल 18-19 साल की उम्र में ही गिरने लगते हैं तो कुछ लोगों के बाल 45 साल के बाद गिरते हैं, लेकिन पूरा गंजापन बहुत कम लोगों में होता है. अधिकतर लोगों के बाल सामने से या बीच से ज्यादा गिरते हैं, कुछ लोगों के बाल बगल से भी गिरते हैं.

डॉ. गोयल के अनुसार शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का बालों की सेहत पर सीधा असर पड़ता है. प्रसव, ऑपरेशन, बीमारी और मानसिक कष्ट की स्थिति से गुजरने के दो-तीन महीने बाद अचानक बहुत सारे बाल एक साथ गिर सकते हैं.

यह दौर अक्सर तीन से छह महीने बाद खुद ही समाप्त हो जाता है और बालों का बढ़ना और झड़ना फिर से पुरानी लय पर लौट आता है.

कुछ दवाईयां खासकर ऐंटीकुएगुलेंट रक्त जमाव रोधी तथा एंटीकैंसर रोधी दवाईयों के प्रयोग से भी मरीज के सिर के बाल अचानक तेजी से झड़ने लगते हैं. बढ़ी हुई सिफलिस और हार्मोनल प्रणाली के कुछ गंभीर विकारों में भी बाल अचानक झड़ने लग सकते हैं.

मस्तिष्क कैंसर के रोगियों में विकिरण चिकित्सा दिए जाने पर भी बालों का उड़ जाना सामान्य बात है. इन बीमारियों में दवा का सेवन बंद कर देने के बाद बाल फिर से उग आते हैं.

कुछ लोगों के सिर में संक्रमण, रूसी या फंगस के संक्रमण के कारण बाल गिरने लगते हैं. त्वचा रोग विशेषज्ञ से इसका इलाज कराने पर बाल फिर से उगने लगते हैं. इन स्थितियों में अगर दवा से फायदा नहीं होता है तब स्टेम सेल थिरेपी कारगर साबित हो सकती है.

डॉ. गोयल बताती हैं कि बेहतर परिणाम के लिए इस तकनीक के साथ-साथ डर्मा रॉलर जैसी अन्य थिरेपियों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. आमतौर पर स्टेम सेल तकनीक की सफलता की दर 60 से 70 प्रतिशत होती है.

Posted by गजेन्द्र सिंह at 9:03 am.

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