लन्दन के शोधकर्ताओं का दावा - गालियाँ बकने से कम होता है दर्द !

याद कीजीए, कई बार दर्द होने पर कितने ही लोगों के मुंह से बर्बस ही गालियां निकल जाती हैं.

हम लोग उस वक्त तो इस बात को नज़रअंदाज़ ज़रूर कर देते हैं पर कभी किसी ने नहीं सोचा कि लोग ऐसा क्यों करते हैं.

लंदन से प्राप्त एक समाचार के मुताबिक दर्द होने की स्थिति में गाली देकर लोग दर्द भगाने की कोशिश करते हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि गालियां देना अपके दर्द को कम करने में मदद कर सकता है. बेशक, यह तभी कारगर होती है जब आप अपनी बोलचाल में अकसर गालियों का इस्तेमाल नहीं करते हैं.

ब्रिटेन की केल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि ऐसे लोग जो अपनी रोज़मर्रा की बोलचाल में गाली-गलौच का उपयोग नहीं करते, गालियां उन्हें लंबे समय तक दर्द बर्दाश्त करने का माद्दा देती हैं. लेकिन उन लोगों पर इसका असर नहीं होता है जो अकसर गालियों का इस्तेमाल होता है.

डेली टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग सामान्य तौर पर अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं करते हैं वे गालियां देते वक्त अपने हाथों को 140 सेकेंड तक बर्फ के पानी में रख सके. बगैर गालियां दिए वह केवल 70 सेकेंड तक ही अपने हाथों को बर्फ की पानी में रख सके.

उनके मुताबिक जो लोग दिन में 60 बार गालियां देते हैं वह अपने हाथों को केवल 120 सेकेंड के लिए पानी में रख सके. वह सामान्य शब्दों का इस्तेमाल करते हुए भी इतनी ही देर तक अपने हाथ बर्फ की पानी में रख पाए थे.

Posted by गजेन्द्र सिंह at 1:34 pm.

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