मौज-मस्ती में किसी की भी दखलंदाजी पसंद नहीं करते 72 फीसदी युवा
ताजा खबरें, लाईफस्टाइल 11:10 am
यहां तक कि उनकी नजर में शादी से पहले रजामंदी से बनाया गया शारीरिक भी गलत नहीं है. इस तरह की सोच रखने वाले युवाओं की संख्या 72 फीसद है.
युवाओं की इस तरह की बिंदास सोच का खुलासा गैर सरकारी संस्था सेंटर फॉर सिविल सोसायटी द्वारा राजधानी के 18 कालेजों में कराये गए सर्वेक्षण में हुआ. सर्वे में इन कॉलेजों के 16 सौ से अधिक छात्र शामिल हैं.
संस्था द्वारा 28 जनवरी से दो फरवरी के बीच दिल्ली के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों के बीच एक सर्वे कराया गया, जिसमें फ्रीडम को लेकर कई तरह के सवाल पूछे गए. सर्वे में शामिल छात्रों (लकड़े-लड़कियां) ने वेबाकी से कहा कि वह बिंदास जिन्दगी जीना चाहते हैं.
उन्हें मौज-मस्ती पसंद है. उन्हें अपनी जिन्दगी में किसी भी तरह से किसी की दखलंदाजी पसंद नहीं है. वे चाहते हैं कि वह खुल कर जिएं. यहां तक कि शादी से पहले रजामंदी शारीरिक संबधों के भी ये पक्षधर हैं. इसी तरह मौज मस्ती के लिए यह मादक पदार्थ का सेवन करने को भी गलत नहीं मानते हैं.
संस्था के अनुसार सव्रे में सेंट स्टीफेन्स, दौलत राम, हंसराज, हिन्दू, मोतीलाल नेहरू, लेडी श्रीराम, वेंकटेर तथा भगत सिंह कॉलेज के 16 सौ से अधिक छात्रों की राय ली गयी है. सर्वे में शामिल युवाओं को इंटरनेट और मीडिया पर भी सेंसरशिप पसंद नहीं है.
सर्वे में शामिल युवाओं से सरकारी प्रतिष्ठानों को लेकर जब सवाल किये गए तो 44 फीसद युवाओं ने कहा कि सरकारी प्रतिष्ठानों को बंद कर दिया जाना चाहिए और निजीकरण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए.
सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी से जुड़े अमित बोडन ने बताया कि 28 जनवरी से दो फरवरी तक कराये गए सर्वे में 16 सौ से अधिक छात्रों की राय ली गयी है. इनमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं.
उन्होंने बताया कि सर्वे रिपोर्ट को जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा. अमित के अनुसार सर्वेक्षण में शामिल 57 फीसद छात्रों का रुझान मध्यमार्गी है, जबकि 20 फीसद छात्रों की सोच समाजवादी और तेरह फीसद छात्र परम्परावादी सोच रखते हैं.

