Posted by गजेन्द्र सिंह
5:54 pm

आगरा, आँखों देखी संवाददाता : भैंस चोरी के एक मामले में पब्लिक ने चोर को पकड़ कर बीच सड़क पर थर्ड डिग्री यातनाएं दीं। बुरी तरह से पीटा और रस्सी से बांधकर टेम्पो में डाल दिया। सामने से पुलिस को आता देख टेम्पो वाला उसे थाने के सामने डालकर भाग गया। थाने के गेट पर पड़े युवक में हरकत होते न देख पुलिस के होश उड़ गए।
घटना एत्माद्दौला थाना क्षेत्र के शाहदरा चुंगी की है। मंगलवार शाम एक युवक भैंस को लेकर आ रहा था। तभी वहां पहुंचे कुछ लोगों ने उसे चोर बताया, जिसके बाद भीड़ ने उसे दबोच लिया। भैंस के बारे में पूछे जाने पर युवक कोई जानकारी नहीं दे सका। जिस पर भीड़ ने उसे पीटना शुरू कर दिया। लगभग आधा घंटे तक बुरी तरह पीटे जाने के वह बेसुध हो गया। इसके बाद भीड़ ने उसे रस्सी से बांधकर लोडिंग टेम्पो में डाल दिया। घटना की सूचना पर कोबरा मोबाइल के जवान पहुंचे, जिन्हें देख टेम्पो चालक ने गाड़ी दौड़ा दी। इसके बाद घायल युवक को थाने के सामने फेंक टेम्पो में आए लोग भाग निकले।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक थाने के गेट पर युवक लगभग 20 मिनट तक लाश की तरह पड़ा रहा। इसके बाद पुलिस ने उसे उपचार के लिए भेजा। एसओ एके सिंह का कहना है कि युवक सलीम पुत्र हनीफ निवासी कालिंदी विहार है। उसका कहना है कि भैंस घूमती मिली थी, जिसे ले जा रहा था। मामले की जांच की जा रही है।
Posted by गजेन्द्र सिंह
मनोरंजन
5:09 pm

आँखों देखी न्यूज़ : भारतीय क्रिकेट टीम के धुरंधर बल्लेबाज सुरेश रैना वेस्टइंडीज के खिलाफ जारी दूसरे टेस्ट मैच में एक बार फिर खराब अंपायरिंग का शिकार बने।
बल्लेबाजों की कब्रगाह बनी बारबाडोस की पिच पर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और उसने मात्र 38 रन पर ही अपने चार विकेट गंवा दिए थे। मैच भारत की पकड़ से निकलता नजर आ रहा था, लेकिन तभी वी.वी.एस लक्ष्मण और सुरेश रैना के बीच पांचवें विकेट के लिए 117 रन की बेशकीमती साझेदारी होने के बाद ऐसा लगने लगा था कि भारतीय टीम की पारी संभल गई है। लेकिन अंपायर असद राउफ के एक निर्णय ने इन उम्मीदों पर पारी फेर दिया। कैरेबियाई गेंदबाज देवेंद्र बिशू की गेंद पर राउफ ने रैना को कैच आउट क्या दिया, भारतीय पारी 46 रनों में आखिरी छह विकेट गंवाकर 201 रनों पर सिमट गई।
बिशू की यह गेंद रैना के लेग स्टंप की ओर उम्मीद से ज्यादा उछली। रैना इस गेंद पर नियंत्रण रखने में नाकाम रहे। गेंद उनके थाई पैड से टकराकर फॉरवर्ड शॉर्ट लेग पर लपक ली गई। और अंपायर ने कैच आउट करार दिया। उस वक्त 53 रन के निजी स्कोर पर था।
अंपायर के इस फैसले से रैना चकित थे। टीवी रिप्ले में साफ पता चल रहा था कि गेंद रैना के बल्ले का किनारा नहीं लिया। रैना ड्रेसिंग रूम में जाने से पहले बाउंड्री लाइन के पास अंपायर के फैसले बदलने के इंतजार में खड़े रहे। रैना ने 105 गेंदों में सात चौकों की मदद से 53 रन बनाए। रैना ने 90 गेंदों का सामना करते हुए सात चौकों की मदद से अपने 50 रन पूरे किए।
इससे पहले सुरेश रैना किंग्सटन में खेले गए श्रृंखला के पहले टेस्ट मैच में भी गलत अंपायरिंग का शिकार हो चुके हैं। भारत ने खराब अंपायरिंग के बावजूद यह टेस्ट मैच 63 रनों से जीता था।
इस मैच में ऑस्ट्रेलियाई अंपायर डेरिल हार्पर ने भारत के खिलाफ तीन और वेस्टइंडीज के पक्ष में तीन-तीन विवादास्पद फैसले दिए थे। हार्पर ने सुरेश रैना, हरभजन सिंह और धोनी के खिलाफ गलत फैसले दिए जबकि उनके फैसलों से डेरेन ब्रावो को दो बार और शिवनारायण चंद्रपॉल को एक बार फायदा पहुंचा था।
Posted by गजेन्द्र सिंह
दुनिया
5:03 pm

नई दिल्ली ,आँखों देखी न्यूज़ : 40 साल से ज्यादा पुराना काबुल का इंटरकॉन्टिनेंटल होटल विदेशी सैलानियों के रुकने का सबसे पसंदीदा मुकाम माना जाता है। सोवियत हमले के बाद इंटरकॉन्टिनेंटल ग्रुप ने होटल की सरपरस्ती से अपने हाथ खींच लिए थे। 2008 में काबुल के सेरेना होटल पर तालिबानी हमले के बाद से यहां सुरक्षा काफी बढ़ा दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद आतंकी होटल को निशाना बनाने में कामयाब रहे।
काबुल का तीन सितारा इंटरकॉन्टिनेंटल होटल शहर के करते पारवान इलाके में है। अफगानिस्तान का ये पहला अंतर्राष्ट्रीय लग्जरी होटल दुनियाभर के सैलानियों का पसंदीदा होटल है। 200 कमरों वाला ये होटल हिंदुकुश की पहाड़ियों में ऐसी जगह है, जहां से पूरा शहर दिखाई देता है।
इंग्लैंड के इंटरकॉन्टिनेंटल होटल ग्रुप ने इस होटल को 1969 में खोला था लेकिन सोवियत हमले के बाद ग्रुप ने 1979 में इससे अपना नाता तोड़ लिया। क्योंकि होटल का इस्तेमाल ऑफिसर्स क्वार्टर की तरह होने लगा था। लेकिन इसके बावजूद होटल ने ग्रुप के नाम और लोगों का इस्तेमाल जारी रखा। 1990 के दशक में सिविल वार के दौरान होटल को कई बार नुकसान पहुंचा और इसकी दीवारों पर आज तक गोलियों के निशान मौजूद हैं। सन 2000 के बाद दुबई की एक कंपनी ने इस होटल की साज-संभाल का ठेका लिया और 25 लाख डॉलर की मदद से इसकी सूरत बदलने का काम किया।
काबुल की पहाड़ी बाग-ए-बाला पर मौजूद इस होटल से घरेलू एयरपोर्ट सिर्फ 9 मील की दूरी पर है। शहर से भी करीब होने की वजह से ये होटल हमेशा विदेशियों से भरा रहता है। अफसरों और खास लोगों की शादियों में ये पहली पसंद है। तो देशभर में होने वाले अहम सरकारी गैर सरकारी जलसों का केंद्र।
2008 में काबुल के सेरेना होटल पर तालिबानी हमले और 8 लोगों के मारे जाने के बाद होटल इंटरकॉन्टिनेंटल की सुरक्षा काफी बढ़ा दी गई थी। तब आतंकवादी पुलिस के भेस में सेरेना होटल में घुसे थे। इसके बाद 2009 में यूनाइटेड नेशंस के गेस्टहाउस पर आत्मघाती हमलावरों ने हमला कर तीन लोगों की हत्या कर दी थी। आतंकियों ने फिर सन 2010 में उत्तरी शहर कुंदूज में आत्मघाती हमला कर चार लोगों को मार डाला था। सभी ठिकाने अंतर्राष्ट्रीय लोगों को निशाना बनाने के लिए चुने गए थे।