नौकरशाहों को यथोचित व्यवहार सिखाएगी दिल्ली पुलिस

आखिरकार दिल्ली सरकार को भी यह अहसास हो गया है कि उसके नौकरशाहों का व्यवहार यथोचित नहीं है.

ज्यादातर अधिकारी नौकरशाहों के लिए बनाई गई आचार संहिता के अनुरूप भी व्यवहार नहीं कर रहें हैं. पब्लिक डिलिंग से संबंधित अधिकारी आम जनता के साथ तो रूखा व्यवहार करते ही हैं, अपने मातहतों को भी नहीं बख्शते.

सरकार ने आंतरिक विश्लेषण में पाया है कि ऐसे अधिकारी बड़ी संख्या में हैं. इन्हीं सब को ध्यान में रखकर अब दिल्ली सरकार ने अपने अफसरों को सलीकेदार बनाने के लिए क्रैश कोर्स करवाने का फैसला किया है. सलीके की पहली पाठशाला पांच मार्च को लगाई जाएगी.

दिल्ली सरकार के आंतरिक सूत्रों का मानना है कि कॉमनवेल्थ गेम्स को लेकर पहले बीके शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट और फिर सीएजी की रिपोर्ट ने जिस तरह दिल्ली से सरकार के अफसरों की छवि को धूमिल किया है, उसका भी असर इन अधिकारियों पर पड़ा है.

प्रोन्नति व ट्रांसफर, पोस्टिंग में तय मापदंडों की अनदेखी करने को भी अफसरों के व्यवहार को रुखा बनाने की अहम वजह बताई जा रही है. सूत्रों के मुताबिक एक बार तो शीर्ष स्तर पर ऐसे अधिकारी की नियुक्ति कर दी गई थी, जो कुछ अफसरों से जूनियर था. नतीजा यह हुआ कि जब तक वे मुख्य सचिव पद पर रहे, तब तक कुछ आला अधिकारियों ने ऐलानिया तौर पर उनकी बैठकों में जाने से भी मना कर दिया था.

हाल के वर्षो में जिस तरह से मध्यम क्रम के अधिकारियों में कड़वाहट बढ़ी है. उसका असर उनके व्यवहार पर भी पड़ा है. वे चाहे मातहत अफसरों के प्रति हो या फिर जनता के प्रति. अधिकारियों के व्यवहार में बदलाव लाने के लिए ही सरकार ने बकायदा सभी विभागों को सकरुलर भेजा है और इस तरह के क्रैश कोर्स करने का निर्देश दिया है.

यह कोर्स डायरेक्टरेट ऑफ ट्रेनिंग एंड यूनियन टेरटरीज सिविल सविर्सेज आयोजित करेगा. इस कोर्स के तहत सवा-सवा घंटे की चार कक्षाएं होंगी. दिल्ली सरकार के एक आला अधिकारी का कहना है कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का असर होता है और पूर्व में देखा गया है कि ऐसे कोसरे से अधिकारियों के व्यवहार के रूखेपन में 20 फीसद की कमी तो आ ही जाती है.

Posted by गजेन्द्र सिंह at 11:32 am.

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