परिसीमन के पेंच में फंस गए हैं समाजवादी पार्टी नेता आजम खान
उत्तर प्रदेश, क्षेत्रीय, ताजा खबरें, janadesh 11:48 am
इस बार उन पर न सिर्फ अपनी सीट से जीतने की जिम्मेदारी है, बल्कि अन्य विधानसभा क्षेत्रों के पार्टी प्रत्याशियों को भी जीत दिलाने का दारोमदार है. आजम के विरोधी इस बार उन्हें उनके 'घर' में ही घेरने की कोशिश कर रहे हैं.
आजम खान के नाम रामपुर जिले से सबसे अधिक और सबसे कम अंतर से चुनाव जीतने का रिकॉर्ड दर्ज है. वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में सपा उम्मीदवार के रूप में आजम को 73,920 वोट मिले थे और उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के अफरोज अली खान को 35,929 वोट हासिल हुए थे.
आजम के खाते में सबसे कम मतों से चुनाव जीतने का रिकॉर्ड भी है. वर्ष 1993 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने महज 600 मतों से जीत हासिल की थी. संयोग से उस समय भी उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी अफरोज अली खान ही थे.
आजम के नाम सबसे अधिक बार चुनाव लड़ने का रिकॉर्ड भी है. वर्ष 1977 से लेकर 2007 तक वह रामपुर विधानसभा सीट से लगातार चुनाव लड़ते रहे हैं. वह नौ बार चुनाव मैदान में उतरे और सात बार उन्हें जीत हासिल हुई है.
दूसरी तरफ बीते चुनावों में आजम के खिलाफ सबसे अधिक बार चुनाव लड़ने वाले और एक बार जीत हासिल करने वाले अफरोज अली खान ने सपा छोड़ने का ऐलान कर दिया है.
सपा के ही पूर्व दिग्गज नेता और प्रमुख रणनीतिकार अमर सिंह ने उन्हें अपने पाले में करने में सफलता पा ली है. सपा छोड़ने के एक दिन बाद ही राष्ट्रीय लोकमंच के महासचिव अरविंद सिंह एवं सांसद जया प्रदा ने शनिवार को उनकी पत्नी रेशमा बी को रामपुर विधानसभा सीट से पार्टी का प्रत्याशी घोषित कर दिया. इससे पहले कयास लगाया जा रहा था कि आजम के मुकाबले इस सीट से पार्टी के स्टार प्रचारक और सांसद जया प्रदा को ही उतारा जाएगा.
आजम की परेशानी नए परिसीमन को लेकर है. रामपुर शहर विधानसभा क्षेत्र में कुछ नए इलाके भी आए हैं जो पहले शाहबाद सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा हुआ करते थे. रामपुर विधानसभा क्षेत्र में जो नया इलाका जुड़ा है, उसमें हिंदू मतदाताओं की संख्या अधिक है. आजम का हालांकि दावा है कि उन पर इसका असर नहीं पड़ने वाला है, क्योंकि उन्हें सभी जाति और धर्म का वोट मिलता है.
आजम खान के मुकाबले बसपा ने जिला पंचायत सदस्य भारत भूषण को मैदान में उतारा है. भूषण दलित और हिंदू वोट बैंक के दम पर आजम को चुनौती पेश कर रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस सीट से अभी अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है. भाजपा अगर किसी हिंदू चेहरे को टिकट पकड़ाती है तो इससे वोट बैंक का बंटवारा होगा. कांग्रेस ने आजम के खिलाफ डॉ. तनवीर को मैदान में उतारा है.
वर्ष 2007 में हुए विधानसभा चुनाव के आंकड़ों की बात करें तो आजम खान ने सपा प्रत्याशी के रूप में 53,091 वोट हासिल कर जीत का परचम लहराया था. उनके बाद दूसरे नम्बर पर अफरोज अली खान थे जिन्हें कांग्रेस ने टिकट थमाया था, उन्हें 19,719 मतों से ही संतोष करना पड़ा था. भाजपा के अनिल वशिष्ठ को 15,260 और बसपा के मुसर्रत खान को 4,502 वोट मिले थे.

