उत्तरप्रदेश सरकार, प्राधिकरण तथा गौतमबुद्ध नगर को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

भूमि अधिग्रहण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तरप्रदेश सरकार, प्राधिकरण तथा गौतमबुद्ध नगर को नोटिस जारी किया है.

ग्रेटर नोएडा के घोड़ी बछेड़ा गांव की 580 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण के विरोध में दायर किसानों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर-प्रदेश सरकार, प्राधिकरण तथा गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी को नोटिस जारी किया है. किसानों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 21 अक्टूबर के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

जस्टिस आरएम लोढ़ा और एचएल गोखले की बेंच के समक्ष दायर याचिका में किसानों ने जमीन एक्वायर करने की राज्य सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं. किसानों का कहना है कि औद्योगिक विकास के नाम पर उनकी जमीन 2005 में अधिग्रहीत करने की अधिसूचना जारी की गई और फिर रिहायशी इस्तेमाल के लिए लैंड यूज बदल दिया गया. किसानों की जमीन 322 रुपए प्रति गज के हिसाब से खरीदकर बिल्डरों को दस हजार रुपए प्रति गज की दर से बेच दी गई. इस तरह किसानों को उनकी जीविका से वंचित करके सरकार ने भारी मुनाफा कमाया. भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 5ए के तहत जमीन एक्वायर करने से पहले किसानों की आपत्ति और सुझाव आमंत्रित करना लाजमी है.

लेकिन सरकार ने धारा 17 के तहत आपातीय अधिकारों का इस्तेमाल करके किसानों की आपत्ति भी नहीं सुनी. जमीन एक्वायर करके के लिए आपातीय अधिकारों के इस्तेमाल की आवश्कयता नहीं थी. याचिका में कहा गया है कि अज्रेसी क्लॉज का उपयोग जनहित के लिए किया जाता है जहां सरकार को सड़क, पुल आदि बनाने हों. लेकिन यहां किसानों से जमीन लेकर बिल्डरों को बहुमंजिला इमारतें बनाने के लिए बेच दी गई. किसानों का यह भी कहना है कि अधिग्रहीत की गई जमीन देश की सर्वाधिक उपजाऊ भूमि है.

यहां किसान साल में तीन फसल निकालते हैं. गेहूं तथा अन्य किस्म के अनाज के अलावा फलों की पैदावार के लिए यह इलाका मशहूर है. यह जमीन उनके पुरखों की है. खेती उनका परम्परागत व्यवसाय है जिससे उन्हें वंचित किया जा रहा है. किसानों ने भूमि अधिग्रहण का विरोध किया था. विरोध करने पर उन्हें पुलिस की लाठियां खानी पड़ी. पुलिस ने 13 अगस्त, 2008 को गांव के लगभग 400 किसानों पर लाठियां बरसाई. सबूत के तौर पर किसानों ने अखबारों की कतरन याचिका में संलग्न की हैं.

किसानों ने हाई कोर्ट के फैसले को कानून के खिलाफ कहा है. हाई कोर्ट ने मुआवजा 64 प्रतिशत बढ़ाने तथा विकसित भूमि में किसानों को दिए जाने वाले प्लॉट एरिया को बढ़ाकर दस प्रतिशत या अधिकतम 2500 वर्ग गज किए जाने का आदेश दिया है. यह सरासर गलत है. जब भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना अवैध है तो बढ़ा मुआवजा देने का आदेश सही नहीं हो सकता. किसानों ने मुआवजा बढ़ाने का आग्रह अदालत से नहीं किया था. हाई कोर्ट ने गांव देवला, यूसुफपुर चाक शाहबेरी और असदुल्लापुर की जमीन एक्वायर करने की अधिसूचना रद्द कर दी थी. लेकिन घोड़ी बछेड़ा के साथ ऐसा नहीं किया गया.

किसानों ने आंकड़े देकर कहा है कि उपजाउ जमीन के अधिग्रहण से देश में खेती योग्य भूमि कम होती जा रही है. सरकार की गलत नीतियों के कारण कृषि योग्य भूमि आठ प्रतिशत कम हो गई है. अगर यही हाल रहा तो देश में अन्न की कमी हो जाएगी.

Posted by गजेन्द्र सिंह at 8:53 am.

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